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500 साल के इतिहास में कोई नहीं हुआ इस हीरो जैसा

बॉलीवुड के किस्से

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500 साल के इतिहास में कोई नहीं हुआ इस हीरो जैसा

काशी भारत का सबसे मनमोहक शहर है. काशी करवट और गंगा स्नान के लिए दुनिया भर से लोग आते रहे हैं और यर सिलसिला सदियों से चलता आ रहा है. इसी काशी की भूमि पर हुआ था रैदास का जन्म. भक्तिकाल वो दौर था, जब अध्यात्म मंदिरों के गर्भगृहों से निकल कर गली मोहल्ले में आ गया. उस समय में रैदास लोंगो के बीच गाना गाकर उनका मन लुभाते थे . लोंगो की भीड़ के बिच , वो लोग जो मंदिर के अन्दर नहीं जा पाते या जिन्हें संस्कृत नहीं आती , रैदास उन्हें गाकर , उनकी भाषा में भक्ति सिखाते . वो बहोत विद्वान तो नहीं थे लेकिन धरनाये ये थी की वो अपनी पिछले जन्म की समझ और विद्या साथ लेकर पैदा हुए थे. रैदास कब पैदा हुए, इसका कोई ठीक ठाक ब्यौरा नहीं है क्यूकि वो एक गरीब परिवार में जन्मे थे .माना जाता है कि रैदास 1450 से 1520 के बीच काशी में रहे. ये आंकड़ा लगभग सही इसलिए है क्योंकि रैदास कबीर के गुरू थे. दोनों ने रामानंद से दीक्षा ली थी. वैसे रैदास और कबीर जैसे महान लोंगो के पैदा होने का साल मायने नहीं रखता. क्योंकि जाति पर रविदास ने जो कहा वो तब भी उतना ही प्रासंगिक था जितना आज है.

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