content-cover-image

भगत सिंह की ये कुर्बानियां हमें सिखाती हैं बहुत कुछ

बॉलीवुड के किस्से

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

भगत सिंह की ये कुर्बानियां हमें सिखाती हैं बहुत कुछ

सिर्फ 23 साल की उम्र में फांसी के फंदे पर झूल जाने वाला लड़का कोई आम इंसान तो नहीं हो सकता . सन् 1907 को, मार्च के ही महीने में पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गाँव ,पाकिस्तान में भगत सिंह का जन्म हुआ था। 1923 में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद उनके माता-पिता चाहते थे कि वो विवाह के बन्धन में बंध जाएं। ऐसे में अगर भगत चाहते तो शादी करके अपना घर बसा सकते थे, लेकिन जब शादी की तैयारियाँ होने लगी तो वे लाहौर से भागकर कानपुर आ गये। कारण कि भगत सिंह की रगों में देशभक्ति जो बहती थी। 1919 में रॉलेक्ट एक्ट के विरोध में पूरा भारत प्रदर्शन करने पर उतर आया था। इसी वर्ष 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग काण्ड भी हुआ। इसकी खबर भगतसिंह को लाहौर से अमृतसर खींच लाई। उन्होंने जलियांवाला बाग काण्ड की खून से भीगी मिट्टी को एक बोतल में रख लिया, ये मिट्टी उन्हें याद दिलाती रहती थी कि उन्हें देश और देशवासियों के अपमान का बदला लेना है। भगत सिंह ने सुखदेव और राजगुरु के साथ मिलकर सेंट्रल असेम्ब्ली में बम फेंका था। इसी के तहत उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसके लिए 24 मार्च 1931 तारीख निर्धारित की गई थी। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी था, जिसने सरकार को झकझोर दिया था। ब्रिटिश सरकार ने जनता के भड़क जाने के डर की वजह से 23-24 मार्च की मध्यरात्रि में ही इन वीरों को फाँसी दे दी थी। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। फाँसी के वक़्त उनके चेहरे पर जरा सी भी शिकन नहीं थी बल्कि भगत सिंह और उनके साथियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा और 'इंकलाब-जिंदाबाद' का नारा लगाते हुए मौत को गले लगा लिया।

Show more
content-cover-image
भगत सिंह की ये कुर्बानियां हमें सिखाती हैं बहुत कुछबॉलीवुड के किस्से