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बच्चों की कॉपी के आखिरी पन्ने कहते हैं बहुत कुछ,ध्यान से सुनें ..

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बच्चों की कॉपी के आखिरी पन्ने कहते हैं बहुत कुछ,ध्यान से सुनें ..

दिल्ली के मयूर विहार स्थित एल्कॉन स्कूल में पढ़ने वाली नौंवीं क्लास की छात्रा की खुदकुशी का मामला अभिभावकों के लिए एक सबक छोड़ गया है. छात्रा की नोटबुक के आखिरी पन्ने पर ऐसी बातें लिखी हैं जो बयां करती है कि वह लंबे समय से डिप्रेशन में थी. छात्रा की खुदकुशी के बाद जब पुलिसकर्मियों ने उसके किताब-कॉपी की छानबीन की तो बड़ी ही हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं. कॉपी के आखिरी पन्ने में छात्रा ने कुछ ऐसी बातें लिख रखी थी, जिसे देखकर साफ पता चलता है कि वह डिप्रेशन में थीं. बच्चों की ओर से कॉपी के अंतिम पन्नों पर लिखने के पीछे के मनोविज्ञान को लेकर जब विशेषज्ञों से बात की गयी तो कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिनसे सबक लेकर हम बच्चों को गलत कदम उठाने से रोक सकते हैं. मुंबई के बाबा हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सागर मुंदड़ा का कहना है कि छोटी उम्र में हर बच्चा अपनी कॉपी के आखिरी पेज पर कुछ-कुछ लिखता है. दरअसल, यहां बच्चे जो कुछ भी लिखते हैं उसमें उनके अंदर की भावनाएं होती हैं. डॉ. सागर मुंदड़ा ने आगे कहा कि मां-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि कहीं उसका बच्चा अचानक से कम बातें तो नहीं करने लगा है, ज्यादा समय घर से बाहर तो नहीं रहता है. क्या अचानक से डायरी लिखने लगा है. इस तरह के कोई भी बदलाव पर पैनी नजर रखने की जरूरत है. उनसे बाततीत करने की जरूरत है.

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