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दलित प्रदर्शन के दौरान आखिर क्यों प्रयोग किया जाता है 'नीला रंग'?

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दलित प्रदर्शन के दौरान आखिर क्यों प्रयोग किया जाता है 'नीला रंग'?

सोमवार को हजारों दलितों ने SC-ST एक्ट के विरोध में पूरे भारत में प्रदर्शन किया था। इस दौरान सभी प्रदर्शनकारी नीले रंग में लिपटे नजर आए थे। किसी ने नीले रंग के कपड़े पहन रखे थे, कोई हाथ में नीले रंग का झंडा लिये था, किसी ने तो अपने पूरे शरीर को ही नीले रंग से पोत लिया था। ऐसे में सवाल उठा कि आखिर यह नीला रंग कहां से आया और दलित प्रदर्शन के दौरान इस रंग का प्रयोग क्यों किया जाता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब प्रदर्शन के दौरान नीले रंग का प्रयोग हुआ, इससे पहले दलित छात्र रोहित वेमूला की सुसाइड के बाद हुए प्रदर्शन में भी नीले रंग का खूब प्रयोग किया गया था। वहीं महाराष्ट्र के भीमा-कोरंगा में हुई घटना के बाद भी नीले झंडे लहराये गए थे। इस मामले में सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर रावसाहब कासबे ने कहा कि नीला रंग आसमान का प्रतीक है। आसमान किसी के साथ भेदभाव नहीं करता है। ऐसा माना जाता है कि आसमान के नीचे सभी लोग एकसमान हैं। इस मामले में कई वाद प्रस्तुत किए गए हैं लेकिन दलित नीले रंग का प्रयोग क्यों करते हैं, इसके पीछे कोई स्थापित इतिहास नहीं है। 2017 में एक पेपर में छपा था कि आंबेडकर ने अपनी इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के लिए नीले रंग का महर झंडा बनाया था। यह झंडा दलित चेतना की पहचान करने का प्रतिनिधि था और गैर-भेदभावपूर्ण था। वहीं नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स की नेशनल कोआर्डिनेटर बीना पालिकन ने कहा कि नीला रंग बाबा साहब के नीले सूट की वजह से प्रचलन में आया।

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