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जानिए बिश्नोई समाज के बारे में , जिन्होंने सलमान ख़ान को घुटनों पर ला दिया

बॉलीवुड के किस्से

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जानिए बिश्नोई समाज के बारे में , जिन्होंने सलमान ख़ान को घुटनों पर ला दिया

जोधपुर से सांसद रहे जसवंत सिंह बिश्नोई कहते है कि उनके संस्थापक जम्भेश्वर जी ने जीव दया का पाठ पढ़ाया था. वे कहते थे कि जीव दया पालनी, रूंख लीलू नहीं घावे' अर्थात जीवों के प्रति दया रखनी चाहिए और पेड़ों की हिफाजत करनी चाहिए. इन कार्यो से व्यक्ति को बैकुंठ मिलता है." इस समाज के लोग दरख्तों और वन्य प्राणियों के लिए रियासत काल में भी हुकूमत से लड़ते रहे हैं. बिश्नोई अपने आराध्य गुरु जम्भेश्वर के बताए 29 नियमों का पालन करते हैं. इनमें एक नियम वन्य जीवों की रक्षा और वृक्षों की हिफाजत से जुड़ा है. इसीलिए जब फ़िल्म स्टार सलमान खान के हाथों काले हिरणों के शिकार का मामला सामने आया तो वे सड़कों पर आ गए. बिश्नोई समाज के लोग जंगली जानवर और पेड़ों के लिए अपनी जान का नज़राना पेश करने को भी तैयार रहते हैं. बिश्नोई समाज के लोग सिर्फ रेगिस्तान तक ही महदूद नहीं है. वे राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी आबाद हैं. मुंशी हरदयाल लिखते हैं कि बिश्नोई समाज के लोग जम्भो जी को हिंदुओं के भगवान् विष्णु का अवतार मानते हैं. बिश्नोई समाज की व्याख्या इस तरह से भी की जाती है कि जम्भो जी ने कुल 29 जीवन सूत्र बताए थे. बीस और नौ मिलकर बिश्नोई हो गए. रेगिस्तान में वन्य जीवों के प्रति बिश्नोई समाज के लोग अडिग खड़े मिलते हैं और बीच-बीच में हिरणों का शिकार करने वालो से उनका मुकाबला भी होता रहता है. बिश्नोई बहुल गावों में ऐसे मंज़र भी मिलते हैं जब कोई बिश्नोई महिला किसी अनाथ हिरण के बच्चे को अंचल में समेटे स्तनपान कराती नजर आती है. बिश्नोई समाज का यही मन्ना है कि "जितना मनुष्य का जीवन मूल्यवान है, उतना ही महत्वपूर्ण है प्रकृति की रक्षा करना है. और इसके लिए वो अपने जीवन तक को त्याग सकते हैं.

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