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देशभर में अक्षय तृतीया को मानते हैं बेहद खास, तो इन गांवों में इस दिन क्यूँ मनाया जाता है शोक ?

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देशभर में अक्षय तृतीया को मानते हैं बेहद खास, तो इन गांवों में इस दिन क्यूँ मनाया जाता है शोक ?

आज 18 अप्रैल, बुधवार को बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व है, यह तिथि देशभर में बहुत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाए उसका कई गुना फल मिलता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है, इसमें किसी भी तरह का कोई मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। वहीं राजस्थान के 18 गांव एेसे हैं जहाँ बिलकुल उल्टा होता है। इन गांवों में इस दिन शुभ कार्य के बजाय शोक मनाया जाता है। राजस्थान के बरवाड़ा, शिवाड़, बलरिया, एकड़ा, हस्तगंज, बासड़ा सहित आसपास के 18 गांवों में अक्षय तृतीया के अवसर पर कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इन गांवों में इस दिन सन्नाटा पसरा रहता है। इसके पीछे चौथ माता की कसम वजह है जो 800 साल पहले ली गयी थी । जी हाँ, लोक मान्यता के अनुसार, चौथ का बरवाड़ा में महाराज फतेह सिंह राजा का शासन था। इस दौरान राजा विद्रमा की बरात यहां बस्ती में आई थी तभी विद्रमा का शत्रु राजा ने इसका फायदा उठाया और हमला कर दिया। राजा लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए। इस दिन सोमवार और आखातीज का पर्व था। इस घटना के बाद बरवाड़ा क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। तब फतेह सिंह सम्पूर्ण बरवाड़ा सहित 18 गांवों में अक्षया तृतीया को विवाह नहीं करने की कसम दिलाई। यहाँ के लोंगो के लिए ये दिन इतना अशुभ है कि इस दिन तेल की कढ़ाई भी नहीं चढ़ाई जाती।

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