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जन्मदिन विशेष पर जानिए किन महिलाओं से मिली थी रवींद्रनाथ टैगोर को प्रेरणा

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जन्मदिन विशेष पर जानिए किन महिलाओं से मिली थी रवींद्रनाथ टैगोर को प्रेरणा

कई प्रतिष्ठित कलाकारों को अपने जीवन में महिलाओं से प्रेरणा मिली थी और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर भी इससे अछूते नहीं रहे थे. लेखिका अरुणा चक्रवर्ती ने अपनी किताब ‘‘डाउटर ऑफ जोड़ासांको’’ में उन महिलाओं के जीवन पर प्रकाश डाला है जो रवीन्द्रनाथ टैगोर के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी थीं. ‘‘जोड़ासांको’’ में टैगोर के परिवार के इतिहास पर प्रकाश डालने के बाद, चक्रवर्ती ने अपनी इस नई किताब में टैगोर के परिवार के सदस्यों और महिलाओं को लेकर टैगोर के दृष्टिकोण की चर्चा की है. इस किताब में कवि में आध्यात्मिक रूप से आये परिवर्तन को बताया गया है. इसमें बताया गया है कि कैसे पितृसत्तात्मक नजरिया रखने वाले टैगोर महिलाओं की खराब स्थिति के लेकर बहुत संवेदनशील हो गये. गुरूदेव रविंद्र नाथ टैगोर का जन्मदिन 7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। रविंद्र नाथ टैगोर बैरिस्टर बनना चाहते थे इसलिए वो लन्दन विश्वविद्यालय में कानून पढ़ने गये थे लेकिन 1880 में बिना डिग्री हासिल किए ही स्वदेश वापस आ गए थे। क्या आप जानते हैं कि टैगोर ने अपनी पहली कविता मात्र आठ साल की उम्र में लिखी थी। उन्होंने करीब 2,230 गीतों की रचना की। वे एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्र-गान जन गण मन बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार। गुरुदेव ने जीवन के अंतिम दिनों में चित्र बनाना शुरू किया था। उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हे सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। टैगोर एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं।

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