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कई बार कोई कॉल या मैसेज नहीं आने पर भी हमें अपने फोन की घंटी बजती हुई क्यों सुनाई देती है?

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कई बार कोई कॉल या मैसेज नहीं आने पर भी हमें अपने फोन की घंटी बजती हुई क्यों सुनाई देती है?

एक अनुमान है कि लगभग 80 प्रतिशत लोगों को अपनी जेब में रखा हुआ मोबाइल फोन बिना किसी कॉल या मैसेज के ही वाइब्रेट होता हुआ महसूस होता है. इसके अलावा 30 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने कभी न कभी अपने फोन की न बजने वाली घंटी सुनी है. बहुत संभावना है कि आप भी इन आंकड़ों में शामिल हों. हम आपको बताते हैं कि कभी-कभी कॉल न आने पर भी हमें फोन की रिंग सुनाई देने या उसमें वाइब्रेशन महसूस होने का भ्रम क्यों होता है. सबसे पहली बात तो यह कि अगर किसी के साथ ऐसा होता है तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि उसके साथ कोई मानसिक समस्या है. कोई समस्या होने के उलट यह एक स्वस्थ मस्तिष्क की निशानी है. इसमें आपका दिमाग परसेप्चुअल जजमेंट करता है और उपलब्ध विकल्पों में किसी एक घटना के होने का एहसास करवाता है. इसे फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम कहा जाता है. मनोवैज्ञानिक इसकी व्याख्या सिग्नल डिटेक्शन थ्योरी के जरिए करते हैं. इसके अनुसार जब आप किसी चीज के बारे में अनजाने ही लगातार सोचते रहते हैं तो आपका शरीर भी उसके अनुसार व्यवहार करना शुरू कर देता है. इस स्थिति में कई बार दिमागी तंत्रिकाएं गलत संदेश भेजने लगती हैं. ऐसा अक्सर दिमाग के भ्रमित होकर गलत सिग्नल्स भेज देने के चलते होता है. कुल मिलाकर, बार-बार फोन बजता हुआ महसूस होने के पीछे की वजह बढ़ता हुआ काम का तनाव या फोन की लत होती है

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