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यहां कभी नहीं ढलता सूरज, फिर कैसे रोजा रखते हैं मुसलमान ?

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यहां कभी नहीं ढलता सूरज, फिर कैसे रोजा रखते हैं मुसलमान ?

ये रमजान का पाक महीना है। इसी महीने के दौरान मुसलमान रोजा रखते हैं। रोजा के दौरान पूरा दिन इन्हें भूखा-प्यासा रहना पड़ता है। वो भी तब तक जब तक कि सूरज छिप नहीं जाता। बता दें मई माह में भीषण गर्भी के दौरान रोजा रखना मुसलमानों के लिए बेहद मुश्किल होता है। लेकिन क्या कभी आपने ऐसी जगह के बारे में सोचा है जहा सूरज कभी नहीं डूबता वहां लोग कैसे रोजा रखते होंगे..? शायद आपको इस बारे में न पता हो कि आर्क्टिक सर्कल में आने वाले देशों में मुस्लिम 24 घंटे सूरज की लाइट में रहते हैं। ऐसे में वो कब सहरी खाएं और कब इफ्तार करें और कब नमाज पढ़ें और कब तरावीह यह सब कैसे किया जाता है यह जानना बेहद दिलचस्प है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि फिनलैंड और स्वीडन उन देशों में से हैं, जहां सूरज बहुत कम वक्त के लिए अस्त होता है। रिपोर्ट के मुताबिक नॉरदर्न फिनलैंड में सूरज गर्मी में 55 मिनट के लिए ही छिपता है। यहां रोजा सुबह के 1:35 बजे शुरू हो जाता है और फिर रात के 12:40 बजे खत्म होता है। यानी महज 55 मिनट खाने पीने के लिए मिलते हैं और पूरे 23 घंटे और 5 मिनट तक रोजा रहता है। ये रोज़ा रखने वालो के लिए कठिन घडी होती है और ऐसा मुमकिन भी नहीं है, इसलिए यहाँ के लोंगो को कोई तरकीब निकालनी पड़ती है. वे समय के हिसाब से रोजा रखते हैं। कुछ मुस्लिम जो लैपलैंड में रहते हैं, उनमें से ज्यादातर मिडिल ईस्ट के टाइम टेबल को फॉलो करते हैं। सभी देशों में रोजे का समय सूरज के निकलने और छिपने की वजह से अलग-अलग होता है। ये समय एक ही देश में अलग-अलग इलाकों में भी अलग-अलग हो सकता है। समय में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है। तो अब आप जान गए न जहां सूरज कभी नहीं ढलता वहां लोग कैसे रोजा रखते हैं।

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