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इस तरह पैदा हुआ था ब्रह्मचारी हनुमान जी का पुत्र मकरध्वज

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इस तरह पैदा हुआ था ब्रह्मचारी हनुमान जी का पुत्र मकरध्वज

हिंदू धर्म में मंगलवार के दिन को काफी शुभ माना जाता है। सप्ताह के सातों दिनों का अपना एक अलग ही महत्व होता है। ऐसे ही मंगलवार का भी अपना एक अलग ही महत्व है। मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। ये बात तो सभी को पता है की हनुमान ब्रह्मचारी थे और उन्होंने विवाह नहीं किया था लेकिन शास्त्रों के अनुसार हनुमान का एक पुत्र था इस बारे बहुत कम लोग जानते है की हनुमान के पुत्र के जन्म किस प्रकार हुआ तो आईये जानते हनुमान के पुत्र के जन्म से जुड़ी कथा के बारे में.. जब हनुमान सीता की खोज में लंका पहुंचे और मेघनाद द्वारा पकड़े जाने पर उन्हें रावण के दरबार में प्रस्तुत किया गया। तब रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवा दी और हनुमान ने जलती हुई पूंछ से लंका जला दी। जलती हुई पूंछ की वजह से हनुमानजी को तीव्र वेदना हो रही थी जिसे शांत करने के लिए वे समुद्र के जल से अपनी पूंछ की अग्नि को शांत करने पहुंचे। उस समय उनके पसीने की एक बूंद पानी में टपकी जिसे एक मछली ने पी लिया था। उसी पसीने की बूंद से वह मछली गर्भवती हो गई और मछली के गर्भ से एक पुत्र उत्पन्न हुआ। जिसका नाम मकरध्वज रखा गया। हनुमान का पुत्र मकरध्वज भी हनुमानजी के समान ही महान पराक्रमी और तेजस्वी था।

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