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अपने मेहबूब की हथेली पर मेहँदी लगाए बैठी हैं डोली की इंतज़ार में बैठी हैं |

Namokar Poetry

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अपने मेहबूब की हथेली पर मेहँदी लगाए बैठी हैं डोली की इंतज़ार में बैठी हैं | Bulandsheher Mushaira

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अपने मेहबूब की हथेली पर मेहँदी लगाए बैठी हैं डोली की इंतज़ार में बैठी हैं |Namokar Poetry