content-cover-image

ख़बरी की ख़ास पेशकश- डॉ राही मासूम रज़ा

कविताएं और शायरी

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

ख़बरी की ख़ास पेशकश- डॉ राही मासूम रज़ा

डा. राही मासूम रज़ा, के बारे में मुझे ज्यादा बताने कि जरुरत तो नहीं है क्योकि अदब को जानने वालो में ये बहुत प्रसिद्द है. डा. राही मासूम रज़ा का जन्म गंगोली, गाजीपुगाव उत्तरप्रदेश में १ सितम्बर, १९२५ को हुआ. और वही गंगा किनारे पर्म्भिक शिक्षा दीक्षा गाजीपुर के एक मुहल्ले में हुई. बचपन में पोलियो हो जाने के कारण उनकी शिक्षा छुट गई थी पर इंटरमीडियट करने के बाद वे अलीगढ आ गए और यही से एम्ए करने के बाद उर्दू में 'तिलिस्म-ए-होशरूबा' पर पीएचडी कि. इसके बाद वे अलीगढ मुस्लिम युनिवेर्सिटी, अलीगढ के उर्दू विभाग में प्रोफेसर हो गए. और अलीगढ के ही एक मुहल्ले बदरबाग में रहने लगे. (शायरी) यही रहते हुए उन्होंने "आधा गाव", 'दिल का एक सादा कागज', ओस की बूंद', ' हिम्मत जोनपुरी', उपन्यास व् १९६५ के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए वीर अब्दुल हामिद कि जीवनी ' छोटे आदमी कि बड़ी कहानी' लिखी. उनकी ये सभी कृतिया हिंदी में थी. आपने प्रसिद्द टीवी सीरियल महाभारत स्क्रिप्ट भी लिखी है. और आप १९७९ में " तुलसी तेरे आँगन की " फिल्म के लिए फिल्म फेयर बेस्ट डायलाग अवार्ड भी जीत चुके है और इस प्रतिभाशाली मशहूर शायर का निधन १५ मार्च, १९९२ को हुआ. परन्तु इस दुनिया से अलविदा कहने के बावजूद डा. राही मासूम रज़ा आज भी हमारे दिलो में जिन्दा है.(शायरी) राही मासूम रज़ा ने शुरुआत में समय की कमी का हवाला देते हुए महाभारत के टेलीविज़न रूपांतरण के लिए डायलॉग लिखने की बीआर चोपड़ा की गुज़ारिश ठुकरा दी थी. लेकिन, हिंदू धर्म के कुछ स्वयंभू संरक्षकों की ओर से उन पर टिप्पणी किए जाने के बाद उर्दू कवि राही मासूम रज़ा न केवल इस भव्य टीवी सीरियल से जुड़े बल्कि उन्होंने महाभारत के संवाद भी लिखे, जो आज भी घर-घर में लोकप्रिय हैं. साल 1990 के दौरान इंडिया टुडे पत्रिका को दिए साक्षात्कार में रज़ा से हिंदू कट्टरपंथियों के विरोध के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे बहुत दुख हुआ… मैं हैरान था कि एक मुसलमान द्वारा पटकथा लेखन को लेकर इतना हंगामा क्यों किया जा रहा है. क्या मैं एक भारतीय नहीं हूं.’ ये बातें रज़ा साहब के दिल से निकली थीं, जो हमेशा अपने आप को गंगा-पुत्र, गंगा किनारे वाला कहा करते थे. सक्सेना ने हार्पर कॉलिंस के हार्पर पेरेनिअल द्वारा प्रकाशित लेख ‘सीन-75’ में ये किस्से लिखे हैं. (मैं समय हूँ)

Show more

content-cover-image
ख़बरी की ख़ास पेशकश- डॉ राही मासूम रज़ा कविताएं और शायरी