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सुप्रीम कोर्ट ने कहा , समलैंगिकता अब अपराध नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा , समलैंगिकता अब अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से बने समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आईपीसी की धारा 377 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरूवार 6 सितम्बर को अपना फैसला सुना दिया और कहा कि यह अपराध नहीं है । लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी । 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बेंच ने माना कि समलैंगिकता अब अपराध नहीं। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। समलैंगिक लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि मैं जो हूं वो हूं। लिहाजा जैसा मैं हूं उसे उसी रूप में स्वीकार किया जाए। कोई भी अपने व्यक्तित्व से बच नहीं सकता है। समाज अब व्यक्तिगतता के लिए बेहतर है। मौजूदा हालत में हमारे विचार-विमर्श विभिन्न पहलू दिखाते हैं । दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर चार अलग अलग राय सामने आई है। मामले की सुनवाई पांच जजों की बेंच कर रही थी । मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, एएम खानविल्कर, डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी । धारा 377 में 'अप्राकृतिक यौन संबंधों को लेकर अपराध के तौर पर जिक्र है।इसके मुताबिक जो भी प्रकृति की व्यवस्था के विपरीत किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ यौनाचार करता है, उसे उम्रकैद या दस साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। इसी व्यवस्था के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं।

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