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गीता दत्त और लता के छोड़े गाने गाती थीं ये महान गायिका

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गीता दत्त और लता के छोड़े गाने गाती थीं ये महान गायिका

आशा भोसले वो शख्सियत हैं जिन्होंने भारतीय संगीत जगत का नाम विश्वभर में प्रसिद्ध किया है। आशा की पॉपुलैरिटी सारी दुनिया में है। उनकी आवाज में मिठास, उनका अंदाज, और उनकी शैली सबसे जुदा है। किसी भी गाने में इमोशन भर देना कोई आशा जी से सीख सकता है। आज उनका जन्मदिन है । उनका जन्म 8 सितम्बर 1933 को ब्रिटिश इंडिया के सांगली स्टेट में हुआ था। उन्होंने 10 साल की उम्र में ही गाना शुरू कर दिया था। आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर 'दीनानाथ मंगेशकर' की बेटी और स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। जब वह महज 9 साल की थीं तब उनके पिता का देहांत हो गया था जिसकी वजह से अपनी बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर उन्होंने परिवार के सपोर्ट के लिए सिंगिंग और एक्टिंग शुरू कर दी थी। आशा ने 1943 की मराठी फिल्म 'माझा बल' में पहला गीत 'चला चला नव बाला' गाया था। मात्र 16 साल की उम्र में आशा ने 31 साल के गणपतराव भोसले से घर वालों के विरुद्ध जाकर भागकर शादी कर ली थी लेकिन ससुराल में माहौल सही ना होने पर पति और ससुराल को छोड़कर अपने दो बच्चों के साथ मायके चली आई थी और फिर से सिंगिंग शुरू कर दी। उस जमाने में जब गीता दत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेशकर का नाम हर तरफ हुआ करता था, आशा भोसले को वो गीत दिए जाते थे जिन्हे ये तीनों गायक छोड़ दिया करते थे। यही कारण है कि 50 के दशक में सेकंड ग्रेड की फिल्मों में ज्यादातर आशा गीत गाया करती थी। बिमल रॉय ने 1953 की फिल्म 'परिणीता' में उन्हें गाने का मौका दिया था, वहीं राज कपूर ने भी 1954 की फिल्म बूट पॉलिश में आशा को मोहम्मद रफी के साथ गीत गाने का अवसर दिया। बी. आर. चोपड़ा की 1957 में आई हुई फिल्म 'नया दौर' ने आशा ताई' को उच्च कोटि की सिंगर का दर्जा दे दिया जब उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ 'मांग के साथ तुम्हारा', 'उड़ें जब जब जुल्फें' और 'साथी हाथ बढ़ाना' जैसे गीतों को अपनी आवाज दी। मशहूर एक्ट्रेस हेलेन के लिए आशा ने कई सारे गीत जैसे 'पिया तू अब तो आजा 'ये मेरा दिल' जैसे हिट गाने गाए। फिल्म 'तीसरी मंजिल' के गीत 'आजा आजा' के लिए आशा ने 10 दिन की रिहर्सल की और उसके बाद पंचम दा के लिए गाना गाया। आशा को 'कैबरे सिंगर' का खिताब दिया गया लेकिन उन्होंने 'उमराव जान' फिल्म में रेखा पर फिल्माई गई गजलों जैसे 'इन आंखों की मस्ती के', 'दिल चीज क्या है' को गाकर बता दिया कि वह एक गजब की वर्सेटाईल सिंगर हैं। 1997 में आशा भोसले पहली भारतीय सिंगर बनी जिन्हे ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया था।

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