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बोहरा के बहाने शियाओं को साध रहे मोदी

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बोहरा के बहाने शियाओं को साध रहे मोदी

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अक्सर मस्जिद में जाते रहे हैं लेकिन देश में नहीं विदेशों में । पीएम बनने के बाद देश में पहली बार वो किसी मस्जिद में गए । मोदी शुक्रवार 14 सितम्बर को इंदौर में दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के कार्यक्रम में शामिल हुए। मुहर्रम के महीने में मोदी का बोहरा समुदाय के बीच पहुंचना और इमाम हुसैन की शहादत में मनाए जाने वाले मातम में शामिल होना शिया मुस्लिमों को बड़ा संदेश है। इसे 2019 के लोकसभा चुनाव के तहत शिया मुसलमानों को साधने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। मोदी इमाम हुसैन की शहादत में होने वाले मातम में पूरी अकीदत के साथ शामिल हुए और मस्जिद में नंगे पांव आए । इतना ही नहीं उन्होंने मातम के दौरान पढ़े जाने वाले मरसिया की मजलिस को भी सुना। मोदी ने कहा कि आप सभी के बीच आना हमेशा मुझे प्रेरणा देता है, एक नया अनुभव देता है। अशरा मुबारक, के इस पवित्र अवसर पर आपने मुझे बुलाया इसलिए आपका आभारी हूं। बोहरा धर्मगुरु सैफुद्दीन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। 2019 के लोकसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। विपक्ष मोदी को मात देने के लिए महागठबंधन बना रहा है, वहीं मुस्लिम उलेमा मोदी के विरोध में खड़े हैं। ऐसे में मोदी ने दाऊदी बोहरा समुदाय के बीच पहुंचकर सिर्फ बोहरा समुदाय को ही साधने की रणनीति नहीं है बल्कि शिया समुदाय को भी अपने पाले में लाने की रणनीति है। नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद मुसलमानों के शिया तबके को अपने साथ मिलाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें मुख्तार अब्बास नकवी को जहां अपनी कैबिनेट में जगह दी वहीं सैयद गय्यूर उल-हसन रिजवी को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष बनाया। यूपी में योगी सरकार के मंत्रिमंडल में मोहसिन रजा को जगह दी गई और बुक्कल नवाब को एमएलसी बनाया गया । इतना ही नहीं अखिलेश सरकार में शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बने वसीम रिजवी को बरकरार रखा गया। पार्टी संगठन में भी शिया समुदाय के लोगों को खास तवज्जो दी गई है । पीएम के मुहर्रम के महीने में मस्जिद में पहुंचना कहीं न कहीं शिया समुदाय से अपनी नजदीकियों को और बढ़ाने की कोशिश के तौर पर माना जा रहा है। बीजेपी की ये कोशिश कितना गुल खिलाती है ये तो 2019 के चुनाव के नतीजे बताएंगे लेकिन मोदी मुसलमानों के शिया और सूफी मुसलमानों को साधने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

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