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मुश्किल वक्त में साथ छोड़ गयी महिला, अखिलेश परेशान

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मुश्किल वक्त में साथ छोड़ गयी महिला, अखिलेश परेशान

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती के बयान पर समाजवादी पार्टी (सपा) में हलचल मच गई है. सपा समझ नहीं पा रही कि 2019 में बीजेपी को हराने के लिए उसने बीएसपी के साथ जिस गठबंधन का मन बनाया था, उसका ऐसा हश्र होगा. मायावती ने अभी हाल में यह कहकर सियासी उथल-पुथल मचा दी कि न तो वे किसी की 'बुआ' हैं और न ही उनका कोई 'भतीजा' है. इसमें कोई दो राय नहीं कि मायावती दलितों की सर्वमान्य नेता हैं, इसलिए बीएसपी के साथ गठबंधन की बीजेपी और सपा की हमेशा कोशिश रहती है. इन दोनों पार्टियों को लगता है कि बीएसपी सुप्रीमो से उनका गठजोड़ हो सकता है. आगरा में बीएसपी का एक भी ऐसा नेता नहीं है जो मायावती और उनके हालिया 'मिजाज परिवर्तन' के बारे में कुछ बोल सके लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 'डैमेज कंट्रोल' करते आसानी से देखा जा सकता है. अखिलेश फिलहाल तीन मोर्चों पर एक साथ जूझ रहे हैं-बीजेपी का हमलावर रुख, मायावती की महत्वाकांक्षा और अपने चाचा शिवपाल यादव की बनाई पार्टी समाजवादी सेकुलर मोर्चा के आसन्न खतरे. सपा के एक नेता ने इंडिया टुडे को बताया कि जिस बात का डर था वही हुआ और मायावती ने सारा मोलतोल करने के बाद पाला बदल लिया. मायावती ने देख लिया कि अगले चुनाव में सपा का अधिकांश वोट शिवपाल यादव की पार्टी को जा सकता है. जिसका अंत नतीजा सपा के वोट बैंक में सेंधमारी है. ऐसी स्थिति में सपा को वोटों का घाटा होगा और बीजेपी आराम से निकल जाएगी.

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