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29 अक्तूबर से होगी अयोध्या के मालिकाना हक पर सुनवाई

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29 अक्तूबर से होगी अयोध्या के मालिकाना हक पर सुनवाई

अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े 1994 के इस्माइल फारूकी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया और कहा कि इसे बडी बेंच के पास नहीं भेजा जायेगा । मतलब नमाज इस्लाम का तो हिस्सा है लेकिन मस्जिद का नहीं । सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 2-1 के फैसले के हिसाब से अपना निर्णय सुनाया। अब अयोध्या की विवादित जमीन के मालिकाना हक की सुनवाई 29 अक्तूबर से शुरू हो जाएगी । पीठ में तीन जज शामिल थे। जस्टिस अशोक भूषण ने अपना और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का फैसला पढ़ा, तो वहीं जस्टिस नजीर ने अपना फैसला अलग से पढ़ा। जस्टिस नजीर इसे बडी बेंच को भेजने के पक्ष में थे । साल 2010 में इलाहाबाद की लखनउ बेंच ने मालिकाना हक के मामले में अपना फैसला दिया था और जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था । एक हिस्सा रामलला विराजमान ,एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड और एक हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया था । हाईकोर्ट की तीन जज की बेंच ने यह फैसला सुनाया था जिसे सभी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी । दरअसल आज आया फैसला जमीन के मालिकाना हक मामले की सुनवाई में बड़ी रूकावट के तौर पर देखा जा रहा था । अब मालिकाना हक की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है ।

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