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रेप दोषी निकाल रहा UPSC की मैग्जीन, बनना चाहता है IAS

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रेप दोषी निकाल रहा UPSC की मैग्जीन, बनना चाहता है IAS

जेल में बंद कैदियों की सकारात्मक कहानियां आती रहती हैं। कई कैदियों ने अपनी लगन और मेहनत से जेल में रहते हुए कई परीक्षाएं पास की हैं। वाराणसी सेंट्रल जेल में हत्या के आरोप में बंद 23 साल के युवक ने 2015 में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडीज में ऑल इंडिया टॉप किया था। चाह हो तो बुरी से बुरी परिस्थ‍िति से बाहर निकला जा सकता है। ऐसी ही कोश‍िश कर रहा है जेल में बंद एक कैदी जिसे रेप के जुर्म में सात साल की सजा हुई है। वो मेहनत के बल पर खुद की ही नहीं बल्कि कई लोगों का भविष्य बदलने की कोश‍िश कर रहा है। विक्रम सिंह खिमता श‍िमला के मॉडल सेंट्रल जेल, कांडा में बंद हैं। सितंबर 2016 में ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत शिमला जिले के मंडोल गांव में रहने वाले विक्रम खिमता को दोषी ठहराया था। विक्रम सिंह को 7 साल की सजा हुई थी। हालांकि विक्रम खुद को निर्दोष मानता है । उसने इस फैसले को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी है। विक्रम सिंह भले ही जेल में बंद हैं, लेकिन वो अपना भविष्य कालकोठरी में बर्बाद नहीं कर रहा है । उसने यूपीएससी और सिविल सेवा की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी एक मैग्जीन तैयार की है। उसकी करेंट अफेयर्स की मैग्जीन 'कंपटीशन कंपेनियन' के अगले कुछ दिनों में लॉन्च होने की उम्मीद की जा रही है। उसने अंग्रेजी और भूगोल में डबल एमए किया है। वो खुद भी सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है । विक्रम सिंह का कहना है कि अगर हाई कोर्ट उन्हें रिहा करता है तो वह परीक्षा देगा । यदि दोषमुक्त होने के प्रयास में सफल नहीं हुआ तो मैग्जीन निकालता रहेगा ।

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