content-cover-image
बंगाली महिलाएं क्‍यों खेलती हैं सिंदूर खेलामुख्य खबरें
00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

बंगाली महिलाएं क्‍यों खेलती हैं सिंदूर खेला
नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा करने के बाद विजयदशमी के दिन पंडालों में महिलाएं मां दुर्गा की पूजा करने के बाद उन्‍हें सिंदूर चढ़ाती हैं। इसके बाद वह उन्‍हें पान और मिठाई का भोग लगा कर एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इस परंपरा को सिंदूर खेला कहा जाता है, जो सदियों से बंगाली समाज में चली आ रही है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं लाल रंग की साड़ी पहन माथे में सिंदूर भर, पंडाल पहुंच कर दुर्गा मां को उलू ध्‍वनी के साथ विदा करती हैं। इसमें विधवा, तलाकशुदा, किन्नर और नगरवधुओं को शामिल नहीं किया जाता। मान्‍यता है कि मां दुर्गा की मांग भर कर उन्‍हें मायके से ससुराल विदा किया जाता है। कहते हैं कि मां दुर्गा पूरे साल में एक बार अपने मायके आती हैं और पांच दिन मायके में रुकने के बाद दुर्गा पूजा होती है।सिंदूर को सदियों से महिलाओं के सुहाग की निशानी माना जाता रहा है । सिंदूर को मां दुर्गा के शादी शुदा होने का प्रतीक माना जाता है इसलिए यही कारण है कि दशमी वाले दिन सभी बंगाली महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर लगाती हैं। मान्‍यता है कि जो महिलाएं सिंदूर खेला की प्रथा निभाती हैं उनका सुहाग तथा बच्‍चा सदा सलामत रहते हैं। पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में, विजयदशमी से पहले सिंदूर खेला मनाया जाता है। कहीं कहीं, सिंदूर खेला महासप्तमी और अष्टमी के दिन ही मनाया जाता है।
Show more
content-cover-image
बंगाली महिलाएं क्‍यों खेलती हैं सिंदूर खेलामुख्य खबरें