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Spl : जानिए क्यूँ, कैसे और किसने शुरू किया था 370 का प्रावधान !

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Spl : जानिए क्यूँ, कैसे और किसने शुरू किया था 370 का प्रावधान !

देश के लिए सोमवार एक ऐतिहासिक दिन रहा . अमित शाह ने राज्यसभा में प्रस्ताव रखा , kashmir से article 370 हटाने का. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कश्मीर से 370 हटा दिया गया इसी के साथ jammu kasmir और ladakh को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया . लेकिन article 370 आया कैसे ...और kashmir में इसे क्यों लागू किया गया? आइये आपको बताते हैं इसकी पूरी कहानी . 15 august 1947 को भारत आज़ाद हुआ . इससे पहले जब अंग्रेज़ यहाँ से जा रहे थे तो भारत छोड़ कर जा रहे थे. किसी रियासत को छोड़कर नहीं . स्वाभिक है ऐसी ही रियासतें मिलकर भारत बना था. जब रियासतें भारत में ही थीं , तो विलय का कोई मतलब ही नहीं बनता . जब भारत से रियासतें बाहर हैं ही नहीं तो विलय कैसा. लेकिन फिर भी विलय का प्रारुप बनाया गया . क्युकी भारत के दो हिस्से किये जा रहे थे. एक का नाम पकिस्तान और दुसरे का नाम हिन्दुस्तान हुआ. ऐसे में विलय पत्र बेहद ज़रूरी था. प्रारूप बनाकर 25 जुलाई 1947 को governor general Mountbatten की अद्याक्ष्ता में सभी रियासतों को बुलाया गया. इन रियासतों को बताया गया की आपको अपना विलय करना है, वो हिन्दुस्तान में करें या पकिस्तान में; ये निर्णय आपका होगा. उस विलय पत्र को सभा में बाँट दिया गया. ये विलय पत्र सभी रियासतों के लिए एक ही format में बनाया गया था. जिसमें कुछ भी लिखना या काटना संभव नहीं था. बस उसपर रियासतों के प्रमुख , राजा या नवाब को अपना नाम, पता , देश का नाम और सील लगाकर उसपर दस्तख़त करके वो governor को देना था और governor को ये बिरनी लेना था की कौन सा राजा किस देश के साथ रह सकता है. 26 october 1947 को jammu और kashmir के तत्कालीन शासक महाराजा हरिसिंह ने अपनी रियासत के भारत में विलय होने के लिए विलय पत्र पर दस्तख़त किये. Mountbatten ने 27 october को इसे मंज़ूरी दी , ना इसमें कोई शर्त शुमार थी और ना ही रियासत के लिए विशेष दर्जे जैसी कोई मांग. इस संवैधानिक दस्तावेज़ पर दस्तख़त होते ही समूचा jammu और kashmir , जिसमें पकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाला इलाक़ा भी शामिल है; भारत का अभिन्न अंग बन गया. बाद के वर्षों में सरदार पटेल की पहल पर रियासत और राज्य , दोनों के ही कानून एक बनाये गए , जो कि केंद्र के संविधान के अधीन थे. 26 october 1947 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने कश्मीर के महाराजा हरिसिंह के साथ Instrument of Accession of jammu and Kashmir to india sign किया.

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