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Spl: Bakraeid: कुर्बानी के पीछे की कहानी

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Spl: Bakraeid: कुर्बानी के पीछे की कहानी

ये बात इस्लाम आने से भी लगभग ३०० से 400 सालपहले की है उस वक्त पैगम्बर हज़रत अब्राहम अलैहिस्सलाम हुए थे जिन्हें मुसलमान, यहूदी और ईसाई अपना पैगम्बर मानते थे! उनके कोई औलाद नहीं थी उनकी दो पत्नियाँ थी हज़ारा और सायरा ,हज़रत अब्राहम अलैहिस्सलाम को हज़ारा से एक औलाद हुई हज़रत इस्माइल उस वक्त तक हज़रत अब्राहम अलैहिस्सलाम की काफी उम्र हो चुकी थी इस तब उनको ये औलाद मिली इस लिए वो उन्हें बहुत चाहते भी थे! फिर अल्लाह की तरफ से हुक्म हुआ की वो अपनी पत्नी हज़ारा और बेटे इस्माइल को रेगिस्तान में छोड़ दे ये एक बड़ा इम्तेहान था तो हज़रत अब्राहम अलैहिस्सलाम ने दिल पर पत्थर रख कर हुक्म का पालन किया ! उन्होंने उन दोनों को वहां छोड़ा जहाँ आज काबा है तब काबा नहीं बना था! चारो तरफ दूर दूर तक रेत ही रेत थी कहीं दूर दूर तक कुछ नहीं था उन्होंने दुखी मन से उन्हें छोड़ा तो हज़रत हज़ारा ने कहा आप दुखी मत हो जब अपने ने हमें अल्लाह के भरोसे छोड़ा है तो वही हमारी देखा भाल करेगा ! वहां सबसे बड़ी परेशानी पानी की थी हज़रत हज़ारा पानी की तलाश में इधर उधर जा रही थी कंही पानी न था एक जगह प्यास की तकलीफ से रेत पर ऐडीयां रगड़ने लगी उससे उस जगह से पानी का सोता फूट पड़ा इतना पानी वहां निकलने लगा की हज़रत हज़ारा को कहना पड़ा ज़म ज़म मतलब ठहर ठहर वो सोता आज भी है जिसे आबेज़म ज़म कहते है

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