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370 पर PAK के घड़ियाली आंसू नहीं आए काम, टूटी आखिरी उम्मीद

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370 पर PAK के घड़ियाली आंसू नहीं आए काम, टूटी आखिरी उम्मीद

कश्मीर मसले पर पाकिस्तान को दुनिया के किसी भी देश से समर्थन नहीं मिल रहा है. अब पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मौजूदा अध्यक्ष देश पोलैंड से भी झटका मिला है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश पोलैंड ने सोमवार को स्पष्ट कह दिया कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद को कश्मीर मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाना होगा. भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण कूटनीतिक रिश्तों पर पोलैंड ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है. इससे पाकिस्तान की यूएनएससी में फिलहाल कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिशों पर पानी फिर गया है. बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता अगस्त महीने में पोलैंड के पास है. सुरक्षा परिषद के सदस्य देश बारी-बारी से हर महीने अध्यक्षता करते हैं. पोलैंड की प्रतिक्रिया से पहले शनिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी देश रूस ने भी कहा था कि भारत का कदम भारतीय गणराज्य के संविधान के दायरे में ही उठाया गया है पोलैंड का ये बयान भारत के ही पक्ष को मजबूत करता है क्योंकि भारत ने हमेशा यही कहा है कि शिमला समझौते, 1972 और लाहौर घोषणा पत्र, 1999 के तहत कश्मीर मुद्दे को भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय तौर पर ही सुलझाया जाना चाहिए. हालांकि, पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाकर कश्मीर मुद्दे को उठाने का फैसला किया है. इस्लामाबाद लंबे वक्त से कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण चाहता रहा है. पोलिश के विदेश मंत्री के बयान के मुताबिक, जयशंकर ने उन्हें बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत किए गए बदलाव सख्त तौर पर आंतरिक मामला है और इसका मकसद आतंकी हमलों के खतरे से घिरे क्षेत्र में सुरक्षा लाना है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान में हुए हालिया बदलावों के किसी भी तरह से वैश्विक नतीजे नहीं होंगे और इससे जम्मू-कश्मीर का अस्थायी दर्जा खत्म कर क्षेत्र में तरक्की के नए मौके उपलब्ध होंगे.

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