content-cover-image

Special: सालों बाद बना है ऐसा संयोग, जानिए राखी बाँधने, बंधवाने का समय

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

Special: सालों बाद बना है ऐसा संयोग, जानिए राखी बाँधने, बंधवाने का समय

रक्षाबंधन का पावन पर्व नजदीक आ रहा है। 15 अगस्त को बहनें अपने भाईयों की कलाई में राखी बांधेंगी। सभी बहनों को हर साल सावन मास की पूर्णिमा का इंतजार रहता है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसके आलावा भी रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बनेगा। इस साल 15 अगस्त को गुरुवार के दिन पूरे देश भर में रक्षाबंधन मनाया जाएगा। इसी त्यौहार के साथ सावन का पावन माह भी समाप्त हो जाएगा। रक्षाबंधन का यह त्यौहार पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस बार यह पावन पर्व बहुत ही शुभ है, क्योंकि इस वर्ष रक्षाबंधन से पहले ही देवगुरु वृहस्पति मार्गी हो रहे हैं। इस बार सबसे खास बात यह है कि राखी बांधने के लिए पूरे दिन मूहर्त रहेंगे। सभी बहनें अपने भाइयों को सुबह से रात तक कभी भी राखी बांध सकती हैं। 15 अगस्त को गुरुवार के दिन श्रवण, सौभग्य योग, बव करण और मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। हर साल रक्षाबंधन के दिन पंचक व भद्रा का साया रहता है, लेकिन इस बार भद्रा का कोई डर नहीं है। श्रवण नक्षत्र में भगवान श्रवण का पूजन विशेष फलदायी माना गया है। इसके बाद इसक दिन आटे से चौक पूजकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें। एक थाली में रोली, अक्षत, कुमकुम, मिठाई, घी का दीया और राखी रखें। इसके बाद भाई को पूर्व दिशा की ओर बैठाकर रोली से तिलक करें और दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधने के बाद अगर भाई छोटा है तो उसे आशीर्वाद दें और बड़ा है तो उससे आशीर्वाद लें। रक्षाबंधन का शुभ मूहर्त सुबह 5 बजकर 53 मिनट से शाम 4 बजकर 20 मिनट तक है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 14 अगस्त को शाम के तीन बजकर 45 मिनट से 15 अगस्त के शाम 5 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। क्या होता है भद्रा काल - मान्यता के अनुसार जब भी भद्रा का समय होता है तो उस दौरान राखी नहीं बांधी जा सकती। भद्राकाल के समय राखी बांधना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। जिस तरह से शनि का स्वभाव क्रूर और क्रोधी है उसी प्रकार से भद्रा का भी है। भद्रा के उग्र स्वभाव के कारण ब्रह्माजी ने इन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया। पंचाग में इनका नाम विष्टी करण रखा गया है। दिन विशेष पर भद्रा करण लगने से शुभ कार्यों को करना निषेध माना गया है।एक अन्य मान्यता के अनुसार रावण की बहन ने भद्राकाल में ही अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधा था जिसके कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था। इस बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल नहीं रहेगा। इसलिये बहनें भाइयों की कलाई पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच किसी भी समय पर राखी बांध सकती हैं।

Show more
content-cover-image
Special: सालों बाद बना है ऐसा संयोग, जानिए राखी बाँधने, बंधवाने का समय मुख्य खबरें