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Auto Sector में 1 साल से मंदी, लाखों नौकरियां खतरे में

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Auto Sector में 1 साल से मंदी, लाखों नौकरियां खतरे में

ऑटो सेक्टर में करीब एक साल से मंदी है। जुलाई में वाहनों की बिक्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, मंदी की वजह से बीते 3 महीने में 2 लाख लोगों का रोजगार छिन गया है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमाबाइल मैन्युफैक्चरर्स के महानिदेशक विष्णु माथुर ने भास्कर ऐप से बातचीत में बताया कि ऑटो इंडस्ट्री ने 3.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को जॉब दे रखा है। मंदी खत्म नहीं हुई तो और नौकरियां जाएंगी। एक रिपोर्ट में ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स ने आने वाले कुछ महीनों में 10 लाख नौकरियों पर खतरा बताया है। इंडस्ट्री के लोगों की मांग है कि सरकार को ऑटोमोबाइल सेक्टर में जीएसटी की दर 28% से घटाकर 18% करनी चाहिए। ऑटो सेक्टर में मंदी का असर इसी से समझा जा सकता है कि घरेलू बाजार में 51% शेयर रखने वाली मारुति सुजुकी ने देश में जनवरी में 1.42 लाख कारें बेचीं, लेकिन छह महीने में ही बिक्री में 31% की गिरावट आ गई और जुलाई में उसकी सिर्फ 98,210 कारें बिकीं। मारुति के बाद 16.2% के साथ दूसरा सबसे बड़ा मार्केट शेयर रखने वाली ह्युंडई के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ह्युंडई ने जनवरी में करीब 45 हजार कारें बेचीं, लेकिन 15% गिरावट के साथ जुलाई में उसकी सेल 39 हजार कारों की रही। ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) के मुताबिक, पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए जीएसटी की दर घटाकर एक समान 18% की जाए ताकि मांग बढ़े और लाखों लोगों की नौकरियां बच सकें। फिलहाल 70 फीसदी ऑटो कंपोनेंट 18% जीएसटी के दायरे में आते हैं। 30 फीसदी कंपोनेंट पर 28% जीएसटी लगता है। सभी ऑटोमोबाइल्स पर भी जीएसटी की यही दर है। इस पर 1% से 15% तक सेस भी लागू होता है।

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