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INX Media Case: Indrani के बयान से कैसे फंस गए Chidambaram?

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INX Media Case: Indrani के बयान से कैसे फंस गए Chidambaram?

शीना बोरा हत्याकांड में जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी के एक बयान और 2007 में यूपीए सरकार के समय आईएनक्स मीडिया को मिली विदेशी निवेश की मंजूरी पी. चिदंबरम पर भारी पड़ी। इन्हीं वजहों के चलते सीबीआई और फिर प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर शिंकजा कसा। मामले के 12 साल बाद बुधवार को उनकी गिरफ्तारी हुई। अब उन्हें 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड में भेज दिया गया है। हालांकि, आईएनक्स मीडिया केस में दर्ज एफआईआर में चिदंबरम आरोपी नहीं हैं। सीबीआई की तरफ से चार्जशीट दायर होना भी बाकी है। अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में जेल में बंद आईएनएक्स मीडिया की पूर्व सीईओ इंद्राणी मुखर्जी इस मामले में सरकारी गवाह बन चुकी है। इंद्राणी ने ईडी के सामने 2017 में दिए बयान में कहा कि वह और पति पीटर मुखर्जी पी. चिदंबरम से दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में 2008 में मिले थे। चिदंबरम ने उनकी कंपनी को विदेशी निवेशी की मंजूरी दिलाने के ऐवज में बेटे कार्ति के बिजनेस में मदद करने को कहा था। इसके बाद वह कार्ति से 2008 में दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में मिली। तब कार्ति ने उससे कहा कि वह उससे या उसके सहयोगियों से जुड़े विदेशी खातों में 10 लाख डॉलर की रकम ट्रांसफर करे। तब पीटर ने इंद्राणी से कहा कि कथित अनियमितताओं का मामला कार्ति की मदद कर हल किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने विदेशी निवेश की मंजूरी के मामले में कार्ति से सलाह ली। कार्ति को इस मामले के बारे में पहले से पता था। जब पीटर ने कहा कि विदेशी खातों में 10 लाख डॉलर की रकम ट्रांसफर नहीं की जा सकती, तब कार्ति ने दो कंपनियों चेस मैनेजमेंट और एडवांटेज स्ट्रैटजिक के नाम सुझाए जिन्हें पेमेंट किया जा सकता था। कार्ति ने कहा कि इन दोनों कंपनियों को आईएनक्स मीडिया का कंसल्टेंट पार्टनर बना दिया जाएगा। इसके बाद चेक से 9.96 लाख रुपए का भुगतान एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंपनी को किया गया। पीटर ने भी ईडी में दर्ज कराए बयान में कहा कि चिदंबरम ने उनसे बेटे कार्ति के कारोबारी हितों का ध्यान रखने को कहा था। चिदंबरम इस मामले में दर्ज एफआईआर में आरोपी नहीं हैं। सीबीआई ने कोई चार्जशीट भी दायर नहीं की है। सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया है। वह उनसे 100 से भी ज्यादा सवाल करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह भी जरूरी नहीं है कि जिसे शुरुआती जांच में आरोपी माना जा रहा हो, उसका नाम एफआईआर में होना जरूरी है। एडवोकेट अजीत सिन्हा बताते हैं कि एफआईआर सिर्फ प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए है। इसके बाद जांच शुरू होती है और बाकी आरोपियों का खुलासा होता है।

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