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Spl: अब कहाँ दिखेगी वो दरियादिली, कहाँ सुनेंगे वो लुभावनी शायरी !

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Spl: अब कहाँ दिखेगी वो दरियादिली, कहाँ सुनेंगे वो लुभावनी शायरी !

कश्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें, लहर लहर तूफान मिलें और मौज-मौज मझधार हमें, फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको, इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें. साल 2016 में बजट पेश करते समय जेटली ने ये शायरी पढ़ी थी. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जहां भाजपा के कई नेताओं का राजनीतिक करियर बनाने में अहम योगदान निभाया वहीं उनको अपने कर्मचारियों पर दरियादिली के लिए भी जाना जाता है। अरुण जेटली अपने ड्राइवर और कुक के बच्चों को वहीं पढ़ाते थे जहां उनके बच्चे पढ़े थे। अरुण जेटली निजी स्टाफ के परिवार की देखरेख भी अपने परिवार की तरह ही करते थे। उनके पास काम करने वालों के बच्चे उसी चाणक्यपुरी स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, जहां जेटली के बच्चे पढ़े। इसके अलावा अगर किसी कर्मचारी का बच्चा विदेश में पढ़ाई करना चाहता था तो वो उसे वहीं पढ़ाते जहां उनके बच्चे पढ़े। ड्राइवर जगन और सहायक पद्म सहित करीब 10 कर्मचारी जेटली परिवार के साथ पिछले दो-तीन दशकों से जुड़े हुए हैं। इनमें से तीन के बच्चे अभी विदेश में पढ़ रहे हैं। जेटली परिवार के खान-पान की पूरी व्यवस्था देखने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक लंदन में पढ़ रही हैं। संसद में साए की तरह जेटली के साथ रहने वाले सहयोगी गोपाल भंडारी का एक बेटा डॉक्टर और दूसरा इंजीनियर बन चुका है। इसके अलावा समूचे स्टाफ में सबसे अहम चेहरा थे सुरेंद्र। वे कोर्ट में जेटली के प्रैक्टिस के समय से उनके साथ थे। घर के ऑफिस से लेकर बाकी सारे काम की निगरानी इन्हीं के जिम्मे थी। जिन कर्मचारियों के बच्चे एमबीए या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते थे, उसमें जेटली फीस से लेकर नौकरी तक का पूरा प्रबंध करते थे। जेटली ने 2005 में अपने सहायक रहे ओपी शर्मा के बेटे चेतन को लॉ की पढ़ाई के दौरान अपनी 6666 नंबर की एसेंट कार गिफ्ट की थी। बात यहाँ मुलाज़िमों को सिर्फ सुविधायें देने की नहीं है बल्कि दिल बड़ा होने की है. यूँ तो कई बड़े लोग हैं जिनके पास सारी ही सुख- सुविधायें उपलब्ध रहती हैं लेकिन वो अपने सहायकों को वो सम्मान नहीं दे पाते जिनके वो हकदार होते हैं. जेटली की बात अलग थी. आज दुःख सिर्फ इस बात का है कि वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हम सबके बीच हमेशा बनी रहेंगी। कुछ तो फूल खिलाये हमने और कुछ फूल खिलाने हैं, मुश्किल ये है बाग में अब तक कांटें कई पुराने हैं। भारतीय जनपा पार्टी के दिग्गज नेता प्रखर वक्ता के रूप में उनकी जो विशेष पहचान थी शायद वो बहुत ही कम लोगों में देखने को मिलती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीबी होने के साथ ही मोदी सरकार -1 में अहम ओहदा रखने वाले चुनिंदा नेताओं में से एक थे। लेकिन उनकी रुचि और बचपन के बारे में कम लोग ही जानते होंगे।

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