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Assam Regional News 27th August

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एनआरसी की फाइनल लिस्ट आने में कुछ ही रोज बचे हैं। असम में रह रहे लोगों की भागादौड़ी भी तेज हो गई है। हर कोई एनआरसी में दर्ज होने के लिए अपने डॉक्युमेंट्स वेरिफाई करवा रहा है। इस बीच आखिरी दौरे के री-वेरिफिकेशन के लिए बुलाए जाने पर असम के कामरूप जिले स्थित अल्पसंख्यक बहुल गांव की एनआरसी की फाइनल लिस्ट में शामिल होने की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। दिलचस्प यह है कि इस गांव की लगभग 95 फीसदी आबादी एनआरसी के ड्राफ्ट में शामिल थी लेकिन फाइनल लिस्ट में उनका नाम होगा या नहीं, इसे लेकर उनके मन में आशंका पैदा हो गई है। असम में अब डिटेंशन कैंप में रहने वाले विदेशियों की रिहाई शुरू हो गई है। विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित जिन विदेशियों ने तीन साल डिटेंशन कैंप में बिताए हैं उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सशर्त छोड़ा जा रहा है। राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी का अंतिम प्रकाशन 31 अगस्त को होगा। 1951 की एनआरसी का अद्यतन विदेशियों की शिनाख्त के लिए किया जा रहा है। इससे पहले ही विदेशी घोषित व्यक्तियों को डिटेंशन कैंप से छोड़ने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। अधिकारियों ने रविवार को कहा कि असम के कामरूप जिले में मुस्लिम ग्रामीणों के एक समूह ने एक हिंदू व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया है, जो 25 साल से अपने परिवार के साथ मुस्लिम दोस्त के घर पर रुका था।पैंसठ वर्षीय राजकुमार गौड़, रंगिया के खांडिकर गाँव में सद्दाम हुसैन के आवास पर रहते थे, उनके पिता की मृत्यु के बाद 1990 में उन्हें बेघर कर दिया था। बाद में राजकुमार गौर की शनिवार को मृत्यु हो गई, हुसैन और उनके दोस्तों ने आइटम खरीदने के लिए पैसे जमा किए। एक हिंदू श्मशान के लिए आवश्यक और एक पुजारी की व्यवस्था की, खांडिकर गांव के निवासी शुकुर अली ने कहा।

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