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राधा के जन्मोत्सव पर हर तरफ राधे-राधे की गूंज

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राधा के जन्मोत्सव पर हर तरफ राधे-राधे की गूंज

राधारानी के जन्मोत्सव पर श्रीधाम बरसाना में आस्था, उल्लास और भक्ति की ऐसी त्रिवेणी बही कि मानो संसार का सारा सौंदर्य यहां सिमट आया। पूरा ब्रह्मांचल पर्वत भक्ति समंदर में डूब गया। गुरुवार रात जैसे ही बृषभान नंदनी का जन्म का हुआ, मंदिर परिसर राधे-राधे से गूंज उठा। लाडली मंदिर बधाई गायन के बाद तड़के चार बजे वेद मंत्रों से गूंज उठा। बरसाना में शुक्रवार दोपहर तक भक्ति का समंदर हिलोरे मारता रहा। श्री जी के भजनों पर भक्त झूम रहे थे। लाडली राधिका के जन्मोत्सव के मौके पर बरसाना नगरी को भव्य तरीके से सजाया गया। गुरुवार देर रात तक भक्तों का बरसाना में पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। हर कोई जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचा। रात करीब दो बजे गोस्वामी समाज के लोगों ने मंदिर परिसर में प्रवेश किया और लाडली जी के अवतरित होने से पूर्व उनकी जन्म की बधाई गाई। यह बधाई गायन जन्म तक चला। देर रात करीब दो बजे सेवायत मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश कर गए और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बृषभान नंदनी के मूल शांत किए। मूल शांति के लिए 27 कुओं का जल, 27 पेड़ों की पत्ती, 27 तरह के मेवा, 27 फल, सोने चांदी के मूल मूलनी और तेल से भरा कांसे का छाया पात्र का प्रयोग किया उसके बाद हवन किया गया। मूल शांति और हवन का कार्यक्रम भोर में करीब 4 बजे तक चला। अभिषेक के दौरान मंदिर में घंटा-घड़ियाल वाद्ययंत्र गुंजायमान हो रहे थे। हर कोई अभिषेक के दर्शनों को लालायित दिखा। यमुनापार क्षेत्र में मथुरा से 12 किलोमीटर दूर बलदेव रोड पर यमुना किनारे राधा जी का गांव रावल है। यहां यमुना किनारे बने राधारानी मंदिर में सुबह पांच बजे से राधा जी के जन्म के दर्शन को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 4:30 बजे राधा जी की मंगला आरती हुई, वहीं पांच बजे जन्मोत्सव के दर्शन हुए। इसके बाद बधाई गायन हुआ और प्रसाद बांटा गया। राधाष्टमी की तैयारियां यूं तो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद से ही शुरू हो गईं थीं लेकिन पिछले तीन दिनों से बरसाना तो बिजली की रंग बिरंगी झालरों से जगमगा उठा। प्रशासन ने राधाष्टमी से एक दिन पहले ही चारों तरफ की सीमा सील कर दी। बाहर से आने वाले श्रद्धालु गाड़ी अंदर ले जाने को लेकर पुलिसकर्मियों से गिड़गिड़ाते हुए दिखे। वाहनों को करीब 5 किमी पहले ही रोक दिया गया। दूर-दूर तक वाहनों की कतार लग गई थी। लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हो रहा था। धर्मशालाएं व गेस्ट हाउस फुल हो गए थे।

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