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International Literacy Day 2019 : कितना पढ़ा-लिखा है भारत?

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International Literacy Day 2019 : कितना पढ़ा-लिखा है भारत?

दुनिया से अशिक्षा को समाप्त करने के संकल्प के साथ आज 53वां 'अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस' मनाया जा रहा है. साल 1966 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को ने शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा विश्व भर के लोगों का इस तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिवर्ष 8 सितंबर को World Literacy Day मनाने का निर्णय लिया था. जिसके बाद हर साल 8 सितंबर को दुनियाभर में ये दिन मनाने की परंपरा जारी है. निरक्षरता को खत्म करने के लिए 'अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस' मनाने का विचार पर पहली बार ईरान के तेहरान में शिक्षा मंत्रियों के विश्व सम्मेलन के दौरान साल 1965 में 8 से 19 सितंबर को चर्चा की गई थी. मानव विकास और समाज के लिए, उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. इस बात से पीछे नहीं हटा जा सकता है कि सफलता और जीने के लिए साक्षरता महत्वपूर्ण है. भारत में या देश-दुनिया में गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरूरी है. ये क्षमता सिर्फ साक्षरता में है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है.ये दिवस लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के मनाया जाता है. साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना- लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है. यह लोगों के अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के अनुसार दुनियाभर में चार अरब लोग साक्षर हैं और आज भी 1 अरब लोग पढ़- लिख नहीं सकते. विद्यालयों की कमी, स्कूल में शौचालय आदि की कमी, जातिवाद, गरीबी, लड़कियों के साथ बलात्कार और छेड़छाड़ होने का डर, जागरूकता की कमी, कम साक्षरता दर के मुख्य कारण हैं. भारत की बात करें तो अभी के आंकडों के मुताबिक हमारे देश की साक्षरता दर 74.04% है, जो की 1947 में मात्र 18 % थी। राज्यों के अनुसार केरल में सबसे ज्यादा साक्षरता प्रतिशत 93.91 फीसदी और बिहार में सबसे कम 63.82 फीसदी बच्चे पढ़े लिखे हैं. भारत की साक्षरता दर विश्व की साक्षरता दर, 84% से कम है। देश में आर्थिक असमानता की तरह ही साक्षरता को लेकर भी महिलाओं और पुरुषों में गहरा अंतर देखने को मिलता है। देश में जहां पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% है वहीं महिलाओं में इसका प्रतिशत महज 65.46 है। महिलाओं में कम साक्षरता का कारण अधिक आबादी और परिवार नियोजन की जानकारी कमी है। यूनेस्को के अनुसार दुनिया भर में करीब 78 करोड़ लोग अशिक्षित हैं। इन 78 करोड़ लोगों का 75 फीसदी केवल इन 10 देशों में है जिनमें भारत, चीन, बांग्लादेश, नाइजीरिया, पाकिस्तान, इथियोपिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और कांगो शामिल है। हालांकि इन 10 मुल्कों में से कुछ ऐसे भी हैं जिनकी साक्षरता दर बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। भारत भले ही विकसित देशों की सूची में बहुत पीछे है लेकिन विकासशील देशों की लिस्ट में उसकी स्थिति बेहतर है। और इसे कायम रखने के लिए हमे निरंतर देश में शिक्षा को अपने प्राण सामान महत्व देना होगा.

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