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Chandrayaan -2: गुज़रते समय के साथ धुंधली होती लैंडर से संपर्क की उम्मीदें

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Chandrayaan -2: गुज़रते समय के साथ धुंधली होती लैंडर से संपर्क की उम्मीदें

भारत के मिशन चंद्रयान-2 के दौरान चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग से ठीक पहले लैंडर विक्रम से मिशन कंट्रोल का संपर्क टूट गया था। लगभग एक हफ्ते का समय बीत जाने के बाद विक्रम से फिर सें संपर्क स्थापित करने की उम्मीदें धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही हैं। इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर चांद की सतह पर विक्रम से संपर्क करने की आखिरी कोशिश में लगा हुआ है। बता दें कि यदि यह सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफल रहता तो इसके भीतर से रोवर बाहर निकलता और चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देता। लैंडर को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया था। इसके भीतर बंद रोवर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है। सात सितंबर की घटना के बाद से लगभग एक सप्ताह निकल चुका है, अब इसरो के पास मात्र एक सप्ताह शेष बचा है। इसरो ने कहा था कि वह 14 दिन तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करता रहेगा। भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क साधने की हर रोज कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रत्येक गुजरते दिन के साथ संभावनाएं क्षीण होती जा रही हैं।

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