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Punjab Regional News 16th September

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लखनपुर में तीन दिन पहले कठुआ पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। आतंकी पठानकोट से होते हुए लखनपुर पहुंचे लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बावजूद पठानकोट पुलिस इसका खुलासा नहीं कर पाई कि आतंकियों ने कौन सा रास्ता अपनाया। पाकिस्तान की सीमा से सटा होने के कारण पंजाब का सबसे संवेदनशील जिला होने के बावजूद आतंकी पठानकोट से निकल गए और पुलिस को पता ही नहीं चला। वहीं, जम्मू-कश्मीर में दाखिल होते ही आतंकियों को दबोच लिया गया। इस सारे प्रकरण से पठानकोट पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शनिवार को इस संबंध में एसएसपी पठानकोट दीपक हिलोरी ने बमियाल में बीएसएफ अधिकारियों से बैठक की। इसके अलावा पुलिस के अन्य अधिकारी नाकों पर जाकर सुरक्षा जांचते रहे। अबोहर के गांव खुईयां सरवर और पंचकोसी के बीच हरीपुरा के नजदीक रविवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार एक दंपति की मौत हो गई। वहीं कार अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे पलट गई। इससे कार चालक भी घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही थाना खुईयां सरवर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। मृतक दंपति श्रीगंगानगर की रामदेव कालोनी निवासी थे। थाना खुईयां सरवर प्रभारी परमजीत कुमार ने बताया कि गांव पंचकोसी से खुईयां सरवर की ओर तेज गति से जा रही कार ने पहले तो आगे जा रही गांव ताजा पटी निवासी रायसाहब की कार को टक्कर मारी। इसके बाद अनियंत्रित होकर सामने से आ रही एक बाइक से जा टकराई और सड़क पर पलट गई। टक्कर से बाइक सवार पति-पत्नी सड़क के किनारे जा गिरे और फसलों की सुरक्षा के लिए खेत के किनारे लगे कोबरा तार में उलझ कर घायल हो गए। 1984 में सिख दंगों के दौरान हुईं हत्याओं, डकैती जैसे गंभीर मामलों की महत्वपूर्ण फाइलें कानपुर में सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गई हैं। यहां दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा 125 से ज्यादा सिखों की हत्याएं हुई थी। राज्य सरकार द्वारा फरवरी, 2019 में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने कानपुर में जब पुलिस रिकॉर्ड खंगाले तो पाया कि उस समय पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से दबा दी गईं हत्या और डकैती संबंधी कई फाइलें अब गायब हैं।

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