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World Heart Day: हृदयाघात की दहलीज़ पर देश का हर चौथा युवा

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World Heart Day: हृदयाघात की दहलीज़ पर देश का हर चौथा युवा

अव्यवस्थित जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण आदि कारणों के चलते आज देश का हर चौथा युवा हृदयाघात की दहलीज पर खड़ा है। इनमें आधे से ज्यादा युवा तो अपने रोग के बारे में जानते तक नहीं। बाकी जानकर भी अंजान हो जाते हैं। यही वजह है कि मात्र 10 फीसदी युवा रोगी उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान की हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रत्येक चार में से एक युवा को उच्च रक्तचाप की शिकायत है। यदि ज्यादा दिन तक इसका उपचार नहीं कराया जाए तो हृदय पर बुरा असर पड़ता है। क्षमता से करीब तीन गुना दबाव होने के कारण हृदय की पंपिंग प्रभावित हो जाती है और मरीज हृदयाघात की चपेट में आ जाता है। आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि करीब 20 करोड़ युवा उच्च रक्तचाप के मरीज हैं, जिनकी उम्र 30 वर्ष से कम है।- पिछले एक वर्ष में 1.5 करोड़ युवाओं में उच्च रक्तचाप की स्क्रीनिंग हो चुकी है. - हृदयाघात आने के चार से पांच घंटे के भीतर उपचार मिलना जरूरी है, अन्यथा दवाएं बेअसर होती हैं।- 19 फीसदी सालाना मौत भारत में हृदयरोग से जुड़ी हैं। - तथा एक बार अटैक आने के बाद 60 फीसदी तक दिल की क्षमता प्रभावित हो जाती है । हृदयरोगी भोजन के साथ अदरक, लौंग, लहसुन, सोंठ, काली मिर्च, पीपल, लौंग, तेजपत्ता, सेंधा नमक का उपयोग करें।- तनाव मुक्त व प्रसन्नचित्त रहें और योग, ध्यान तथा प्राणायाम करें, प्रतिदिन पैदल भी चलें। कम खाएं और एक समय में 80 ग्राम/80 एमएल केलोरिक भोजन से अधिक न लें।- ट्रेडमिल पर चलें तो कोशिश करें कि आपका हार्ट रेट 80 हो। अपने दिल का ख्याल रखें, ये दिमाग जितना ही ज़रूरी है.

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