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मुस्लिमों का दिल जीतने में कसर नहीं छोड़ रहे Fadnavis

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मुस्लिमों का दिल जीतने में कसर नहीं छोड़ रहे Fadnavis

महाराष्ट्र और मुंबई में हमेशा भाजपा-शिवसेना गठबंधन का सिरदर्द बनते रहे मुस्लिम मतदाता इस बार न सिर्फ खामोश हैं, बल्कि उनके बीच यह जबरदस्त मंथन चल रहा है कि क्या उन्हें वक्त के साथ बदलना नहीं चाहिए। मुसलमानों की इस सोच को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पांच साल की सरकार के कामकाज और खुद फडणवीस के नरम रुख ने भी हवा दी है। दूसरी तरफ कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के रवैये और मुसलमानों के भाजपा-शिवसेना विरोध की मजबूरी को इस वोट बैंक पर अपनी बपौती मान लेने की सोच ने भी उन मुस्लिम नेताओं का काम आसान किया है जिन्हें भाजपा-शिवसेना के प्रति नरम रुख रखने वाला माना जाता है। मुसलमानों की खामोशी और कुछ हिस्सों के बदलते रुख से कांग्रेस-एनसीपी नेता पसोपेश में हैं। यूं तो भाजपा-शिवसेना गठबंधन के चुनावी प्रचार का मुख्य आधार हिंदुत्व ही है, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुसलमानों को भी रिझाने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस काम में उनकी मदद कर रहे हैं गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुस्लिम राजनीति के पुराने सिपहसालार जफर सरेशवाला।

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