content-cover-image

Sat Inspiration: भारत की एक और Mother Teresa- Sindhu Tai

Let's Get Inspired

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

Sat Inspiration: भारत की एक और Mother Teresa- Sindhu Tai

सिंधुताई सपकाल की जिन्दगी एक ऐसे बच्चे के तौर पर शुरू हुई थी, जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी. उसके बाद शादी हुई, पति मिला वो गालियां देने और मारने वाला. जब वो नौ महीने की गर्भवती थीं तो उसने उन्हें छोड़ दिया. जिस परिस्थ‍िति में वो थीं कोई भी हिम्मत हार जाता लेकिन सिंधुताई हर मुसीबत के साथ और मजबूत होती गईं. आज वो 2000 से ज़्यादा बच्चों की मां हैं. सिंधु ताई के जीवन की कहानी बेहद दर्दनाक है, मगर उससे उबरकर उन्होंने दूसरों की जिंदगी को रोशन करने का जो जज्बा दिखाया, वो हैरान कर देने वाला है।कुछ महीनों बाद तबेले में एक बेटी को जन्म दिया और अगले तीन वर्ष ट्रेनों में भीख मांगकर गुजारा करते हुए बीते। भीख मांगने के दौरान वो ऐसे कई बच्चों के संपर्क में आईं जिनका कोई नहीं था. उन बच्चों में उन्हें अपना दुख नजर आया और उन्होंने उन सभी को गोद ले लिया. उन्होंने अपने साथ-साथ इन बच्चों के लिए भी भीख मांगना शुरू कर दिया. इसके बाद तो सिलसिला चल निकला. जो भी बच्चा उन्हें अनाथ मिलता वो उसे अपना लेतीं. अब तक वो 1400 से अधिक बच्चों को अपना चुकी हैं. वो उन्हें पढ़ाती है, उनकी शादी कराती हैं और जिन्दगी को नए सिरे से शुरू करने में मदद करती हैं. ये सभी बच्चे उन्हें माई कहकर बुलाते हैं. बच्चों में भेदभाव न हो जाए इसलिए उन्होंने अपनी बेटी किसी और को दे दी. आज उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है और वो भी एक अनाथालय चलाती है.कुछ वक्त बाद उनका पति उनके पास लौट आया और उन्होंने उसे माफ करते हुए अपने सबसे बड़े बेटे के तौर पर स्वीकार भी कर लिया. बच्चे के जन्म के समय गर्भनाल स्वयं महिला को पत्थर से तोड़ना पड़े...इससे बड़ा दुःख किसी महिला की जिंदगी में क्या होगा? सिंधु ताई सपकाळ ने यह दुःख भोगा है और यही नहीं इसके जैसे कई दुःख और भी हैं। अपने संघर्ष के दिनों में उन्हें बेटी को एक अनाथाश्रम में रखने की नौबत आ पड़ी। बेटी को छोड़ने के बाद रेलवे स्टेशन पर जब एक निराश्रित बच्चा पड़ा मिला तो उनके मस्तिष्क में विचार कौंधा ऐसे हजारों बच्चे और भी हैं। उनका क्या होगा? उन्ही दिनों में उनके पास जब रहने के लिए कोई जगह नहीं थी और सर पे कोई छत्त नहीं थी तो वो शमशान में रहती थी, और कहते हैं न की इंसान पेट के लिए क्या नहीं करता है, तो उन्होंने भी किया और कुछ ऐसा किया जिससे हर किसी की शायद रूह काँप जाएगी , उन्होंने दाह संस्कार की बची हुई सुलगती लड़कियों पर रोटियां सेंकी, वो बच्चे जिनके खाने-पीने की चिंता करने वाला कोई नहीं था. सिंधुताई ने इन बच्चों को उस वक्त अपनाया जब वो खुद अपने लिए आसरा जुटाने के लिए प्रयास कर रही थीं. सिंधुताई एक नाम से कहीं ज्यादा हैं. 73 साल की इस औरत के भीतर सैकड़ों कहानियां छिपी हुई हैं. सिंधुताई की फुर्ती को देखकर शायद ही आप अंदाजा लगा पाएं कि वो बुजुर्ग हो चुकी हैं. लोग उन्हें प्यार से 'अनाथों की मां' कहते हैं. उन्हें महाराष्ट्र का मदर टेरेसा भी कहते हैं, और वहाँ के लोग उन्हें माई कहते हैं. एक हंसता-‍खिलखिलाता चेहरा पुरानी बातों को याद करने के साथ ही बुझ जाता है. पर उनकी बातें किसी के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं. वो कहती हैं कि मैं उन सबके लिए हूं जिनका कोई नहीं है. वो अपने अब तक के सफर के बारे में बताते हुए सबसे पहले यही कहती हैं कि वो एक ऐसी संतान थीं जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी. उनका नाम भी चिंधी था, जिसका मतलब होता है किसी कपड़े का फटा हुआ टुकड़ा. हालांकि उनके पिता ने उनका पूरा साथ दिया और वो उन्हें पढ़ाने के लिए भी आतुर थे पर चौथी कक्षा के बाद वो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं. उन पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई और बाद में कच्ची उम्र में ही शादी कर दी गई. 10 साल की उम्र में वो 30 साल के आदमी की घरवाली थीं. उनके पति ने उन्हें दुख देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सिंधुताई का परिवार बहुत बड़ा है. उनके 207 जमाई है, 36 बहुएं हैं और 1000 से अधिक पोते-पोतियां हैं. आज भी वो अपने काम को बिना रुके करती जा रही हैं. वो किसी से मदद नहीं लेती हैं बल्कि खुद स्पीच देकर पैसे जमा करने की कोशिश करती हैं. उनके इस काम के लिए उन्हें 700 से अधिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है. उनके नाम पर 6 संस्थाएं चलती हैं जो अनाथ बच्चों की मदद करती हैं. सिंधुताई दुःखों का पहाड़ है पर इस पहाड़ से निर्मलता और ममता का झरना बहता है और सहज रुप से समाज सेवा करने का जज्बा आपमें पैदा होता है।

Show more
content-cover-image
Sat Inspiration: भारत की एक और Mother Teresa- Sindhu Tai Let's Get Inspired