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Spl: सबसे पुराना मुक़दमा, कब? कैसे? क्या है अयोध्या विवाद

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Spl: सबसे पुराना मुक़दमा, कब? कैसे? क्या है अयोध्या विवाद

अयोध्या में विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सीजेआई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने इस ऐतिहासिक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगले महीने 17 नवंबर को सीजेआई रिटायर होने वाले हैं और उससे पहले अयोध्या विवाद पर फैसला आ जाएगा। 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ अलग-अलग पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और इस साल अगस्त में मामले की नियमित सुनवाई शुरू की। बीते बुधवार को 40वें दिन की सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो गईं। आखिर कब शुरू हुआ अयोध्या विवाद, आइए आपको बताते हैं विवाद का पूरा इतिहास। 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए। 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी। मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई। फरवरी 1885 में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद के उप-जज के सामने याचिका दायर की कि यहां मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए। जज पंडित हरिकृष्ण ने यह कहकर इसे खारिज कर दिया कि यह चबूतरा पहले से मौजूद मस्जिद के इतना करीब है कि इस पर मंदिर बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं।

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