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Haryana Regional News 26th October

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चुनाव में टिकटों के वितरण का दौर वह समय होता है, जिसमें सबसे ज्यादा नेता पार्टी छोड़ते हैं। नेताओं को जहां से टिकट की आस दिखती है उसी के हो जाते हैं। इनमें से कोई टिकट लेकर खुद को सिकंदर साबित करता है तो कइयों के अरमान आंसुओं में बह जाते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में भी यही हुआ। कई नेताओं ने पार्टियां छोड़ी, कोई दूसरी पार्टी से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरा तो कुछ ने निर्दलीय ही लड़ने का फैसला किया। इनमें से कुछ जीतकर विधानसभा पहुंच गए, कुछ के सपने अधर में रह गए। वहीं कुछ नेता न खुद जीते पाए न मूल पार्टी जीत पाई और फायदा दूसरी पार्टियों ने उठा लिया। हरियाणा में 24 अक्टूबर को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ। सरकार बनाने के लिए उन्हें 6 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में सिरसा से जीतकर आए हरियाणा लोकहित पार्टी के विधायक गोपाल कांडा ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। कांडा के समर्थन के बाद बीजेपी के साथ-साथ आम लोगों की बहस शुरू हो गई है कि वे एक एयरहोस्टेस के सुसाइड केस में आरोपी हैं, ऐसे में उन्हें पार्टी में शामिल कैसे किया जा सकता है। इस बहस के बीच सोशल मीडिया पर पूरी चर्चा हो रही है।गोपाल कांडा का जन्म हरियाणा के सिरसा में दिसंबर 1965 में हुआ। उनके पिता मुरलीधर कांडा सिरसा में वकील थे और इनेलो नेता ओमप्रकाश चौटाला के करीबी थे। सिरसा के लोग बताते हैं कि कांडा ने हवाई चप्पल और जूतों की दुकान भी खोली। फिर जूतों की छोटी फैक्ट्री भी लगाई। 1997 में कांडा गुरुग्राम शिफ्ट हो गए और वहां प्रॉपर्टी का कारोबार करने लगे।

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