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J&K Spl: हम क्या पायेंगे, क्या खो कर? आखिर सरकार चाहती क्या है?

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J&K Spl: हम क्या पायेंगे, क्या खो कर? आखिर सरकार चाहती क्या है?

जम्मू-कश्मीर को मिला राज्य का दर्जा गुरुवार को खत्म हो गया और इसके साथ ही उसे औपचारिक रूप से दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया. इसके साथ ही दोनों केंद्र शासित राज्यों के उप राज्यपाल भी अपना पदभार संभाल लिया . पहली बार किसी राज्य को दो केंद्र शासित राज्यों में बांटा गया है भारत में ऐसे कई उदाहरण हैं जब किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य में बदला गया हो या एक राज्य को दो राज्यों में बांटा गया हो, लेकिन ऐसा पहली बार है कि एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया. गिरीश चंद्र मुर्मू जम्मू-कश्मीर के एलजी और आरके माथुर लद्दाख के एलजी के रूप में पदभार ग्रहण करलिया . इस सिलसिले में श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथ ग्रहण समारोहों का आयोजन किया गया और जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल दोनों को शपथ दिलायी .जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 के मुताबिक दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियुक्ति का दिन 31 अक्टूबर होगा और ये केंद्र शासित प्रदेश आधी रात (बुधवार-गुरुवार) को अस्तित्व में आएंगे. इस फैसले के साथ ही भारत गणराज्य में कुल 28 राज्य होंगे और 9 केंद्रशासित प्रदेश होंगे. अब सबसे बड़ा सवाल क्या कश्मीर में सब कुछ सामान्य हो गया है? सरकार भले ही कहते रहे कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं. लेकिन सरकार के एक्शन से पता चल रहा है कि वहां स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है. अभी तक सरकार सारे प्रतिबंध नहीं हटा सकी है. हिंसा की घटनाएं भी हो रही हैं. इसका मतलब हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं.और जैसे ही कुछ ढील दी जाती है कोई न कोई घटना हो जाती है और प्रतिबन्ध फिर लागु कर दिए जाते है अब 31 October के बाद क्या बदला जानते है तो अब जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवस्था और पुलिस के अधिकार केंद्र सरकार के पास होंगे. लेकिन जमीन के अधिकार राज्य सरकार के पास होंगे. इसके अलावा रूरल डवलपमेंट, एजुकेशन, हेल्थ के अधिकार भी राज्य सरकार के पास होंगे. उपराज्यपाल जम्मू-कश्मीर में एक तरीके से रूल करेंगे. लेकिन फिर भी वह केंद्र के अंतर्गत आएंगे. केंद्र ने तकनीकी जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक बिल को लागू कर दिया है, लेकिन प्रेक्टिकली अभी ये लागू नहीं हुआ है.ये प्रेसिडेंशियल ऑर्डर से ही मालूम चल रहा है.इसका मतलब आप यू समझे की एलजी की कई शक्तिया अभी भी केंद्र सरकार के पास होगी एक तरीके से केंद्र का ही शासन जम्मू और कश्मीर में रहने वाला है ! अब बड़ा प्रश्न ये है कि क्या घाटी इसको मानेगी क्या अवाम साथ देगा ? ये तब पता चलेगा जब जनता बाहर निकलेगी जब सारे प्रतिबन्ध हटा लिए जायेगे पर फ़िलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा अगर सरकार के एक्शन से देखे तो ये प्रतिबन्ध अभी चलेगे क्योकि जो लोग शाह को जानते है उनका कहना है वो जनता को दो ही आप्शन देना चाहते है या तो उनके हिसाब से चले या फिर प्रतिबन्ध में रहे ! यही बात वहां के नेताओ पर भी लागु होती है ! सरकार को ये ताकत उसकी विदेश नीति से मिली है जिसमें उसने पाकिस्तान को कश्मीर मसले पर अलग थलग कर दिया वहीँ राष्ट्रवाद की तलवार से विपक्ष को भी खमोश कर दिया ! अब कश्मीर में बीजेपी ने कश्मीर के नेताओ को परिवार वाद का हवाला दे कर बदनाम करना शुरू कर दिया है इसके पीछे मंशा ये है की बीजेपी और केंद्र वहां नया राजनीतिक जमात खड़ी करना चाहती है वो और सरकार चाहती है कि नए लोग राजनीती में आये जिनका फायदा उसे हो सके ! अब देखना ये है की क्या ये प्रयोग कामयाब होगा ! कमेंट कर के जरूर बताये !

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