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RCEP के खिलाफ़ देशभर में किसान सड़क पर, दूध बर्बाद होने की चिंता

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RCEP के खिलाफ़ देशभर में किसान सड़क पर, दूध बर्बाद होने की चिंता

रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप में भारत के शामिल होने के विरोध में सोमवार को देशभर में किसान सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की चिंता है कि अगर भारत आरसीईपी की संधि में शामिल होता है तो देश के कृषि क्षेत्र पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. इतना ही नहीं भारत का डेयरी उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा. आरसीईपी में भारत के शामिल होने पर किसान संगठनों की कड़ी आपत्ति है. किसानों का कहना है कि ये संधि होती है तो देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को इनके उत्पाद का जो मूल्य मिल रहा है, उसमें गिरावट आ जाएगी. इसी मद्देनजर देश में करीब 250 किसान संगठन जिला और स्थानीय स्तर पर इसके विरोध में प्रदर्शन करेंगे. बता दें कि आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो कि सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में कई सहूलियत देगा. इसके तहत निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं देना पड़ेगा या तो बहुत कम देना होगा. इसमें आसियान के 10 देशों के साथ अन्य 6 देश हैं. किसान संगठनों का कहना है कि भारत में ज्यादातर किसानों के पास 2 से 4 गाय हैं, जिनके दूध से उनका परिवार चलता है. वहीं, दूसरी ओर न्यूजीलैंड के किसानों के पास 1000-1000 की संख्या में गाय हैं. आरसीईपी समझौता होने से 90 फीसदी वस्तुओं पर आयात शुल्क जीरो हो जाएगा. इससे भारतीय उद्योगों और किसानों की कमर पूरी तरह टूट जाएगी.

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