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EPF घोटाले में नए दस्तावेज़ों से योगी सरकार की बढ़ी परेशानी

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EPF घोटाले में नए दस्तावेज़ों से योगी सरकार की बढ़ी परेशानी

उत्तर प्रदेश के कर्मचारी भविष्य निधि घोटाला योगी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. सामने आए नए दस्तावेजों से पता चला है कि विवादास्पद कंपनी दीवान हाउसिंग फायनेंस लिमिटेड में 2,600 करोड़ रुपये निवेश करने का फैसला योगी सरकार के 19 मार्च, 2017 को सत्ता पर काबिज होने के बाद लिया गया. शुरुआत में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने दावा किया था कि निजी कंपनी डीएचएफएल में ईपीएफ निवेश करने का निर्णय पूर्व की अखिलेश यादव सरकार के दौरान लिया गया था. बिजली यूनियन के प्रमुख नेता शैलेंद्र दुबे ने कहा कि हालांकि वह घोटाले की सीबीआई जांच कराने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह सबसे पहले ऊर्जा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों को हटा दें, ताकि डीएचएफएल मुद्दे से संबंधित दस्तावेज और फाइलें सुरक्षित रह सकें. बता दें कि जिस विवादास्पद कंपनी डीएचएफएल में ईपीएफ का पैसा निवेश किया गया, वह माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम से सहयोगी मृत इकबाल मिर्ची से संबंधित है. कंपनी के प्रमोटरों से प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में पूछताछ की थी. इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार अभी तक यह कहती रही है कि यह फैसला अखिलेश यादव की सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में लिया गया था और निवेश की प्रक्रिया 2016 के दौरान भी चलती रही. योगी सरकार ने इस मामले में तत्काल फैसला लिया और एक प्राथमिकी दर्ज कराई. इसके साथ ही दो वरिष्ठ अधिकारियों यूपी स्टेट पॉवर इंप्लाईस ट्रस्ट और यूपीपीसीएल के प्रोविंडेंट फंड ट्रस्ट तत्कालीन सचिव प्रवीण गुप्ता और यूपीपीसीएल के पूर्व निदेशक फायनेंस सुधाशु द्विवेदी को गिरफ्तार किया.

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