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तीस हज़ारी मामले पर विशेष: लड़ेंगे वकील और पुलिस तो कैसे बचेगी आम लोगों की जान?

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तीस हज़ारी मामले पर विशेष: लड़ेंगे वकील और पुलिस तो कैसे बचेगी आम लोगों की जान?

दिल्ली की सड़कों पर कुछ ऐसा देखने को मिल रहा है जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया. दिल्ली के रखवाले यानि दिल्ली पुलिस खुद ही अपने लिए इंसाफ मांग रही है. वर्दी में खुद पुलिसकर्मी और उनके परिवारवाले पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. वजह है वकीलों के साथ हुई लड़ाई और फिर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट. 2 नवंबर को तीस हज़ारी कोर्ट से ये मामला शुरू हुआ था जब वकीलों और पुलिस में मारपीट हुई थी। इसके बाद 3 और 4 नवंबर को कड़कड़डूमा कोर्ट और फिर साकेत कोर्ट में वकीलों ने पुलिसकर्मियों को पीटा जिसके बाद से पुलिसकर्मी अपनी मांगे लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और चीख-चीख कर we want justice के नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारी पुलिस हाथ में काली पट्टी बांधकर पहुंचे और वकीलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहें हैं. हालांकि पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने पुलिसकर्मियों को काम पर लौटने की सलाह दी लेकिन उनका प्रदर्शन अभी भी जारी रहा. पुलिसकर्मियों की मांग है कि वकीलों के खिलाफ़ एक्शन लिया जाना चाहिए. पुलिसवालों ने कहा उन्हें लगातार डर बना हुआ कि शहर में कहीं पर भी उनपर हमला हो सकता है. इसको देखते हुए कमिश्नर ने इमरजेंसी बैठक बुलाई. उधर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हड़ताली वकीलों से तुरंत काम पर लौटने को कहा और सभी जिलों के बार एसोसिएशन को चिट्ठी लिखी है. हिंसा में शामिल वकीलों के नाम मांगे गए हैं. दूसरी तरफ नरेला में पुलिसवालों के परिवार ने सड़क जाम कर दी है.

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