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अयोध्या मामला: एक 'रिपोर्ट' ने बदल दी सारी तस्वीर, जजों ने इसे ही माना विशेष सबूत

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अयोध्या मामला: एक 'रिपोर्ट' ने बदल दी सारी तस्वीर, जजों ने इसे ही माना विशेष सबूत

जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही कहा कि निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह दी जाएगी. अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस पर कहा कि मस्जिद को गिराना कानून का उल्लंघन था. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. एएसआई के मुताबिक मंदिर के ढांचे के ऊपर ही मस्जिद बनाई गई थी. प्रधान न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आस्था के आधार पर फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. हालांकि यह विवाद सुलझाने के लिए संकेतक हो सकता है. अदालत को लोगों की आस्था को स्वीकार करना होगा और संतुलन बनाना होगा. अदालत ने कहा कि रामजन्मभूमि कोई व्यक्ति नहीं है, जो कानून के दायरे में आता हो. अदालत ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस पर शक नहीं किया जा सकता. पुरातत्व विभाग की खोज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा हुआ करती थी. इसके सबूत हैं कि हिंदुओं के पास विवादित जमीन के बाहरी हिस्से पर कब्जा था. अदालत ने माना कि हिंदू इसे भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं. मुस्लिम इसे मस्जिद कहते हैं. हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम केंद्रीय गुंबद के नीचे जन्मे थे. यह व्यक्तिगत आस्था की बात है. अदालत ने कहा कि अयोध्या में राम के जन्म का किसी ने विरोध नहीं किया है. कोर्ट ने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए अलग जमीन दी जाए. अदालत ने कहा कि या तो केंद्र सरकार अयोध्या में अधिग्रहित जमीन में से सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन दे या फिर उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या शहर में कहीं और मुस्लिम पक्ष को जमीन दे.

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