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Ayodhya Verdict: Justice Ganguly को हो रही फ़ैसले से दिक्कत

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Ayodhya Verdict: Justice Ganguly को हो रही फ़ैसले से दिक्कत

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से फ़ैसला मंदिर के पक्ष में तो सुनाया लेकिन साथ में यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद तोड़ना एक अवैध कृत्य था. फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि मस्जिद के नीचे एक संरचना थी जो इस्लामी नहीं थी, लेकिन यह भी कहा है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का दावा भारतीय पुरातत्वविदों ने नहीं किया. जब यह फ़ैसला आया तो अलग-अलग तरह से व्याख्या शुरू हुई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गांगुली उन पहले लोगों में थे जिन्होंने अयोध्या फ़ैसले पर कई सवाल खड़े किए. जस्टिस गांगुली का मुख्य सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस आधार पर हिन्दू पक्ष को विवादित ज़मीन देने का फ़ैसला किया है वो उनकी समझ से परे है. जस्टिस गांगुली ने एक इंटरव्यू में कहा, ''अल्पसंख्यकों ने पीढ़ियों से देखा कि वहां एक मस्जिद थी. मस्जिद तोड़ी गई. अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार वहां एक मंदिर बनेगा. इस फ़ैसले ने मेरे मन में एक शक पैदा किया है. संविधान के एक स्टूडेंट के तौर पर मुझे इसे स्वीकार करने में थोड़ी दिक़्क़त हो रही है.'' बता दे की 72 साल के जस्टिस गांगुली वही हैं जिन्होंने 2012 में टू-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में फ़ैसला सुनाया था

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