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5 प्रवेश द्वार, 212 स्तंभः कुछ ऐसा हो सकता है अयोध्या का राम मंदिर

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5 प्रवेश द्वार, 212 स्तंभः कुछ ऐसा हो सकता है अयोध्या का राम मंदिर

कई दशकों से चले आ रहे अयोध्या भूमि विवाद का निपटारा हो चुका है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. अब हर किसी के मन में कुछ सवाल तैर रहे हैं? जैसे मंदिर निर्माण कब से शुरू होगा? अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर कैसा होगा? आपको बता दें, राम जन्मभूमि मंदिर के लिए मॉडल को साल 1989 में ही तैयार कर लिया गया था. इतना ही नहीं दशकों तक विवाद चलने के दौरान भी राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में मंदिर निर्माण को लेकर तैयारियां चलती रहीं. विश्व हिंदू परिषद नेता शरद शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण ट्रस्ट की देखरेख में होगा. लेकिन ऐसी उम्मीद है कि ट्रस्ट राम जन्मभूमि न्यास द्वारा तैयार किए गए डिजाइन के अनुसार ही भव्य मंदिर का निर्माण कराएगा. शरद शर्मा ने बताया कि राम जन्मभूमि न्यास 1990 से ही अयोध्या के कारसेवकपुरम में एक विशाल कार्यशाला चला रही है और कारीगर इतने दिनों से पत्थरों की नक्काशी इसलिए कर रहे थे क्योंकि उन्हें यकीन था कि एक दिन इनका इस्तेमाल ‘राम लला’ के मंदिर निर्माण में किया जाएगा. प्रस्तावित राम मंदिर का एक लकड़ी का मॉडल दो दशकों से कार्यशाला स्थल पर रखा गया है, और कई भक्त मॉडल देखने के लिए भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं. कार्यशाला प्रभारी डॉ अन्नू भाई सोमपुरा ने बताया, आरजेएन की योजना के अनुसार जो मंदिर बनाया जाएगा वो 268 फीट लंबा, 140 फीट चौड़ा और 128 फीट ऊंचा होगा और इसमें कुल 212 स्तंभ होंगे. लगभग आधी संख्या में स्तंभ तैयार हैं, जबकि मंदिर के फ्लोर के लिए काम पहले ही खत्म हो चुका है. राम मंदिर में पांच प्रवेश द्वार होंगे. सिंह द्वार, नृत्य मंडप, रैंड मंडप, पूजा कक्ष और परिक्रमा के साथ सर्व-महत्वपूर्ण 'गर्भगृह'. राम लला की मूर्ति को वहीं पर ही रखा जाएगा. मंदिर के पूर्ण निर्माण के लिए कम से कम 1.75 लाख क्यूबिक फीट पत्थर की जरूरत होगी.

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