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Weekly Review: Ayodhya से लेकर Maharashtra तक, कुछ यूँ रहा सफर

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Weekly Review: Ayodhya से लेकर Maharashtra तक, कुछ यूँ रहा सफर

नमस्कार , खबरी के weekly रिव्यु में आप का स्वागत है इसमें हम आप को बतायेगे बीते हफ्ते की प्रमुख ख़बर और उनके पीछे की खबर जो आप कही नहीं पायेगे तो सुनिए ....पिछले हफ्ते राम मंदिर,maharastra में बनती बिगडती सरकार ,राफेल ,सुप्रीम कोर्ट ,और देश में जानलेवा प्रदुषण ने सुर्खिया बटोरी .... तो दोस्तों हफ्ते शुरुआत हुई अयोध्या पर आये ऐतिहासिक फैसले से सैकडो साल से राम मंदिर के संघर्ष की आखिर जीत हुई, सर्वोच्च न्यायलय ने करोडो हिन्दुओ को अपने अराध्य राम का मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया ! अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण को प्रशस्त करने वाले इस सर्वोच्च निर्णय की अपेक्षा केवल इसलिए नहीं की जा रही थी कि भारतीय समाज के एक बहुत बड़े वर्ग की यह मान्यता थी कि अयोध्या का विवादित स्थल राम की जन्मभूमि है, बल्कि इसलिए भी की जा रही थी कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व के प्रमाण इसी ओर संकेत कर रहे थे कि राम मंदिर के स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया। यह मस्जिद को दिए गए नाम बाबरी से ही नहीं, विवादित ढांचे के आसपास बने अनेक मंदिरों से भी स्पष्ट होता था। इससे इन्कार नहीं कि इस फैसले से कुछ लोगों को मायूसी होगी, लेकिन कोई भी समाज हो वह नियम-कानूनों से ही चलता है और ऐसा कोई फैसला नहीं हो सकता जो सबको समान रूप से संतुष्ट कर सके। चूंकि सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी कोई अदालत नहीं इसलिए उसके फैसले को स्वीकार करने के अलावा और कोई उपाय भी नहीं! हालाँकि मुस्लिम समाज के आम लोगो ने इस फैसले को खुले मन से स्वीकार कर लिया है उसका कारण है आज 65 % जनता वो है जो बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद पैदा हुई है ! लेकिन उन लोगो में बैचेनी है जिनकी राजनीती और दुकान दोनों इस फैसले के बाद बंद होने के कगार पर है! इसके बाद सुर्खियों में आया maharastra यू तो सत्ता के लिए कोई भी ऐसा दल नहीं जो अवसरवादी राजनीति से अछूता हो, लेकिन जो शिवसेना कर रही है वह राजनीतिक निर्लज्जता की पराकाष्ठा है। शिवसेना अपने सत्ता लोभ में खुद को बाला साहब ठाकरे की विरासत से ही अलग नहीं कर रही है, उस कांग्रेस के समक्ष नतमस्तक भी हो रही है जिसके विरोध से ही उसका जन्म हुआ था। 370 , सामान नागरिकता कानून , सावरकर ,बहुत से मुद्दे है जिस पर जवाब देना मुश्किल हो जायेगा! अगर ये गठ बंधन होता है तो शिवसेना अपना बड़ा वोट बैंक बीजेपी को गिफ्ट कर देगी ! कहा जाता है शिवसेना की इस जिद के पीछे है प्रशांत किशोर जिन्होंने शिवसेना प्रमुख को ये मुख्य मंत्री का खवाब दिखाया है ! लेकिन फ़िलहाल शिवसेना की राहें आसान नहीं है क्योकि एनसीपी ने भी 50:50 की डिमांड कर दी है !

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