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Weekend Inspiration: Laxmi - तेज़ाब में नहीं झुलसे जिसके सपने

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Weekend Inspiration: Laxmi - तेज़ाब में नहीं झुलसे जिसके सपने

वो 15 साल की थी और बड़ी होकर एक कामयाब सिंगर बनना चाहती थी। मगर सिर्फ एक ना यानी कि इंकार ने उसके सारे सपनों को जला कर रख दिया और उसकी जिंदगी बदल गई। उसके उपर हमला हुआ। वो भी ऐसा-वैसा हमला नहीं बल्कि वो हमला जो जिस्म के साथ-साथ आत्मा भी जला देता है। इस हमले के ज़ख्म से रिसने वाले मवाद तो एक समय के बाद बंद हो जाते हैं मगर इसका दर्द पूरी जिंदगी रिसता रहता है। इस हमले में हो सकता है कि शिकार होने वाले की जान चली जाए। अगर वो बच गया तो समाज उसे दोयम दर्जे का नागरिक बना देता है। जिंदगी बेहद बोझिल व दर्दनाक हो जाती है और वो तिल-तिल कर जीने को मजबूर हो जाता है। हम बात कर रहे हैं एसिड अटैक (तेजाबी हमले) की।जरा सोचिए कि हमारे चेहरे पर कोई दाग लग जाता है तो हम उसे जल्द से जल्द साफ करने के लिये दौ़ड़ते है और तबतक बेचैन रहते हैं जबतक चेहरा पहले जैसा ना हो जाये। ऐसे में उन लोगों की बेचैनी का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो एसिड अटैक का शिकार बनते हैं। आज इसी कड़ी में एक ऐसी एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी (तस्वीर नीचे स्लाइडर में) की जिंदगी पर चर्चा करने वाले हैं जिसका चेहरा दरिंदों ने तेजाब से बिगाड़ तो दिया मगर उसके हौसलों का बाल तक बांका नहीं कर सके। जी हां उस पीड़िता का नाम लक्ष्मी है जिसने हमले के बाद से समाज में अपने हक के लिए आवाज उठानी शुरु की।आज लक्ष्मी देश में एसिड अटैक की शिकार लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

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