content-cover-image

Jharkhand Chunav में RJD को खल रही Lalu Yadav की कमी

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

Jharkhand Chunav में RJD को खल रही Lalu Yadav की कमी

बिहार में सियासत की एक धुरी माने जाने वाली राष्ट्रीय जनता दल का ग्राफ पड़ोसी राज्य झारखंड में गिरता रहा है. झारखंड के नेताओं को इस विधानसभा चुनाव में आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में खोई हुई जमीन लौटाने की चुनौती है. हालांकि, इस चुनाव में आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद की कमी भी यहां के नेताओं को खल रही है. बिहार से अलग झारखंड के बनने के बाद आरजेडी की पहचान मजबूत पार्टी के तौर होती थी, लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता गया, वैसे-वैसे उसकी जमीन सिमटती चली गई. इस विधानसभा चुनाव में आरजेडी एक बार फिर पूरी ताकत के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरी है. झारखंड राज्य गठन के पहले आरजेडी झारखंड के कई क्षेत्रों में काफी मजबूत था, लेकिन झारखंड गठन के बाद से ही उसका कुनबा ध्वस्त होता चला गया. पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका. इस बार गठबंधन के साथ सात सीटों पर चुनाव मैदान में है. 1995 में झारखंड , जो उस समय बिहार राज्य का हिस्सा था में 14 सीटें तक जीती थी, मगर झारखंड बनने के बाद से आरजेडी की जमीन पर अन्य दल कब्जा जमाते चले गए. पिछले चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, जबकि 2009 में पांच सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब हो सकी थी. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष सिंह कहते हैं कि पार्टी को लालू प्रसाद जैसे स्टार प्रचारक की कमी पिछले चुनाव से ही खल रही है. पार्टी को अभी तक उनके बराबर का नेता नहीं मिल पाया है. चुनावों में लालू प्रसाद को सुनने के लिए हर वर्ग के लोगों की भीड़ होती थी.

Show more
content-cover-image
Jharkhand Chunav में RJD को खल रही Lalu Yadav की कमीमुख्य खबरें