content-cover-image

#Attackrapist: आख़िर कब तक? Join Our Campaign

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

#Attackrapist: आख़िर कब तक? Join Our Campaign

फिर एक बार नज़रे झुकी है...क्योंकि दरिंदो के हौसले बड़े है.... फिर एक बार नज़रे झुकी है..क्योंकि हम चुप्पी साधे खड़े है... चलो फिर से मोमबत्तियां ही जलाते है..क्योंकि जहां आग जलनी चाहिए वहां तो शोले ठंडे पड़े है... क्यूँ....क्योंकि हम चुप्पी साधे खड़े है... चलो शुरू करो सोशल मीडिया पर जस्टिस का नाटक..क्योंकि जहां एक्टिव होना चाहिए वहां तो सब लाश जैसे पड़े है... फिर एक बार अपनी नज़रे झुका लो...क्योंकि हम चुप्पी साधे खड़े है... बेटी बचाओ...बेटी पढ़ाओ का नाटक अब क्यों करना है... वो निर्भया हो या प्रियंका सबको शर्मसार होकर ही तो मरना है जब खुद पर आंच पड़ेगी...तब सोचोगे कि हम इसके लिए क्यों नही लड़े है फिर जली हुई लाश के सिवा कुछ न मिलेगा..क्योंकि हम चुप्पी साधे खड़े है... अकेली लड़की को देख हम कब समझेंगे... कि वो मौका नही ज़िम्मेदारी है... समय रहते होश में नही आये...तो पता नही अगली किसकी बारी है... शहर दिल्ली हो हैदराबाद या लखनऊ...ऐसे दरिंदे हर जगह मौके की ताक में पड़े है क्यों.....क्योंकि हम अभी भी चुप्पी साधे खड़े है... हैवानियत की हदें अब हर रोज़ पार हो रही क्योंकि जो मज़बूत होती जा रही वो इनकी जड़ें है.. फिर एक बार नज़रे झुकी है...क्योंकि हम चुप्पी साधे खड़े है...

Show more
content-cover-image
#Attackrapist: आख़िर कब तक? Join Our Campaignमुख्य खबरें