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#Attackrapists: क्या है Zero FIR जिसे दर्ज करने से पुलिस इंकार नहीं कर सकती

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#Attackrapists: क्या है Zero FIR जिसे दर्ज करने से पुलिस इंकार नहीं कर सकती

हैदराबाद में पिछले सप्‍ताह एक जघन्‍य वारदात हुई। यहां चार दरिंदों ने एक महिला डॉक्‍टर से दुष्‍कर्म करके उनकी हत्‍या कर दी। जहां यह घटना हुई, उस इलाके नाम शमसाबाद है। घटना के बाद शमसाबाद पुलिस ने मामले की एफआईआर (First Information Report) दर्ज करने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि घटनास्‍थल उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का है। इसके बाद से ही इस पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। सायबराबाद पुलिस कमिश्‍नर ने शनिवार को राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (RGIA) के तीन पुलिसकर्मियों को सस्‍पेंड कर दिया। इनमें एक सब-इंस्‍पेक्‍टर भी शामिल हैं। इन लोगों ने वेटरनरी डॉक्‍टर की बहन की मदद की गुहार को अनदेखा कर दिया था। इसके बाद सायबराबाद पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि क्षेत्राधिकार को ना देखते हुए, थाने में आई शिकायत पर प्राथमिकता से सबसे पहले स्‍वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज करें। सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक बेंच ने लतिका कुमारी वर्सेस उत्‍तर प्रदेश सरकार के एक मामले में यह व्‍यवस्‍था दी है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 154 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज किया जाना अनिवार्य है। यह बात हर तरह के संज्ञेय अपराध के मामले में लागू होती है। सामान्‍य तौर पर एफआईआर पुलिस थानों में क्षेत्राधिकार के हिसाब से दर्ज की जाती है। यानी जिस जगह अपराध हुआ है, वहां जो भी संबंधित थाना लगता है, वह इस पर केस दर्ज करता है। लेकिन पुलिस को घटना (संज्ञेय अपराध) की सूचना मिलने पर ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) जिसे, शून्‍य पर कायमी भी कहा जाता है, वह दर्ज की जा सकती है। इसका इस बात से संबंध नहीं होता है कि वह घटना पुलिस के थाना क्षेत्र में हुई है या नहीं। हां, यह बात जरूर है कि ज़ीरो पर एफआईआर केवल दर्ज की जा सकती है, इसका क्रमांक नहीं बनाया जाता। इस तरह की बिना क्रमांक की एफआईआर को इसके बाद संबंधित पुलिस थाने को भेज दिया जाता है जहां बकायदा इसका क्रमांक दर्ज किया जाता है और फिर इसे विवेचना के लिए प्रक्रिया में लिया जाता है। आपको बता दें की दिसंबर 2012 में दिल्‍ली में हुए दुष्‍कर्म के मामले के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिश थी कि जीरो पर एफआईआर का प्रावधान चलन में लाया जाए।

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