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Amit Shah ने बताए नागरिक संशोधन बिल के प्रावधान

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Amit Shah ने बताए नागरिक संशोधन बिल के प्रावधान

नागरिकता संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पास हो गया। बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। गृहमंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा कि यह बिल यातनाओं से मुक्ति का दस्तावेज है और भारतीय मुस्लिमों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। शाह ने कहा कि यह बिल केवल 3 देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यकों के लिए है और इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं, क्योंकि वहां का राष्ट्रीय धर्म ही इस्लाम है। शाह ने कहा- शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है। अपने धर्म, बहू-बेटियों की रक्षा के लिए भारत में शरण मांगने वाला शरणार्थी है, घुसपैठिया नहीं। गैरकानूनी तरीके से देश में घुसने वाला घुसपैठिया है। हम एनआरसी भी लाएंगे, देश में एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा। वोटबैंक की राजनीति करने वालों के मंसूबे हम कभी कामयाब नहीं होने देंगे। गैर-मुस्लिमों को नागरिकता के मुद्दे पर शाह ने कहा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का राष्ट्रीय धर्म इस्लाम है। वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। इसी से वहां पर अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की संभावना क्षीण हो जाती है। 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23% थी और 2011 में 3.7% हो गई। बांग्लादेश में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 22% और 2011 में 7.8% हो गई। ये अल्पसंख्यक कहां गए। ये लोग मार दिए गए, धर्म परिवर्तन हुआ, भगा दिए गए? जो लोग बिल का विरोध कर रहे हैं, वे बताएं कि इन अल्पसंख्यकों का क्या दोष है? हम चाहते हैं कि उनका अस्तित्व बना रहे। वे सम्मान के साथ दुनिया के सामने खड़े हों। पड़ोसी देशों में अगर अल्पसंख्यकों को धर्म के नाम पर प्रताड़ना दी जाती है तो हम मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। भारत उन्हें बचाएगा। बता दे कि नागरिकता संशोधन विधेयक 1955 में आया। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती है। उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान हैं। साथ ही सरकार ने संशोधित विधेयक में पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को नागरिकता मिलने का समय घटाकर 11 साल से 6 साल करदिया है। मुस्लिमों और अन्य देशों के नागरिकों के लिए यह अवधि 11 साल ही रहेगी। अंत में ये भी बता दे की जिन्होंने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया है या उनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो गई है, उन्हें भी भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की सुविधा रहेगी। बिना वैध दस्तावेजों के पाए गए मुस्लिमों को जेल का निर्वासित किए जाने का प्रावधान ही रहेगा।

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