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Special: 'भारत' की आज़ादी या 'भाड़े' की आज़ादी ?

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Special: 'भारत' की आज़ादी या 'भाड़े' की आज़ादी ?

*क्या है हमारी आज़ादी का असली राज़ *99 साल की लीज पर भारत युद्ध भूमि में भारत कभी नहीं हारा, लेकिन अपने ही चन्द जयचन्दों से हारा है। अपनों ने जो समझौते किये, यह उससे हारा है, अपनी मूर्खता से हारा है। उन्हीं समझौतों में एक “सत्ता के हस्तांतरण का समझौता” भी शामिल है। पाकिस्तान गान्धी की लाश पर बन रहा था, लेकिन इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 का न तो गान्धी ने विरोध किया, न ही जिन्ना ने, न ही नेहरू ने और न ही सरदार पटेल ने। सभी ने ब्रिटिश उपनिवेश यानी ब्रिटेन की दासता स्वीकार की थी। वाकई मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आता है जो कश्मीर को उपनिवेश इण्डिया से उपनिवेश पाकिस्तान में मिलाने के लिए रक्त बहाते हैं। भारत को छद्म स्वतन्त्रता देने का विचार तो 1942 में ही कर लिया गया था,1948 तक का समय सुनिश्चित करना तो महज़ एक बहाना था। 1947 के जून महीने में यह ज्ञात हुआ कि मुहम्मद अली जिन्ना, जो वास्तव में पुन्जामल ठक्कर का पोता था, की टी.बी. की बीमारी अन्तिम स्तर पर है और अधिक से अधिक 1 वर्ष की आयु शेष बची है। *भारत की (छद्म) स्वतन्त्रता और भारत- विभाजन की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया गया ।

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